कानपुर में आज चंपत राय:अशोक सिंघल जन्मशताब्दी वर्ष कार्यक्रम में होंगे शामिल, पूरे साल होंगे कार्यक्रम

Sep 30, 2026 - 06:33
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कानपुर में आज चंपत राय:अशोक सिंघल जन्मशताब्दी वर्ष कार्यक्रम में होंगे शामिल, पूरे साल होंगे कार्यक्रम
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय बुधवार शाम कानपुर में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। शहर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, बेनाझाबर में आयोजित अशोक सिंघल जन्मशताब्दी वर्ष के मुख्य कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम की शुरुआत शाम 5 बजे होगी। इससे पहले शाम 4 बजे बैठक आयोजित की जाएगी। अशोक सिंघल के सेवा, सामाजिक समरसता, हिंदू सशक्तिकरण और मंदिरों की मुक्ति से जुड़े संकल्पों को आगे बढ़ाने के लिए विश्व हिंदू परिषद की ओर से पूरे वर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह जानकारी विहिप कानपुर प्रांत के कार्याध्यक्ष डॉ. उमेश पालीवाल ने दी। काशी-मथुरा की मुक्ति समेत कई संकल्पों पर जोर डॉ. उमेश पालीवाल ने जानकारी दी कि 27 सितंबर से अशोक सिंघल के जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत के साथ उनके प्रेरणादायी जीवन, चिंतन और राष्ट्र व समाज के लिए किए गए योगदान को याद किया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या की मुक्ति के संकल्प की पूर्णता के बाद काशी और मथुरा की मुक्ति के संकल्प को आगे बढ़ाना, अवैध धर्मांतरण पर रोक, घरवापसी को गति देना, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने, वैदिक ज्ञान-विज्ञान के संवर्धन के साथ सेवा और सामाजिक समरसता के कार्यों का विस्तार जन्मशताब्दी वर्ष के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। हर जिले और प्रखंड स्तर पर होंगे कार्यक्रम जन्मशताब्दी वर्ष के दौरान कानपुर प्रांत के प्रत्येक जिले, प्रखंड और खंड स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। एक वर्ष तक विचार गोष्ठियां, धर्मसभाएं, समरसता सम्मेलन, युवा संवाद और अशोक सिंघल के जीवन एवं कार्यों पर आधारित प्रदर्शनियां आयोजित होंगी। इसके अलावा वंचित बस्तियों में सेवा प्रकल्पों का विस्तार कर सामाजिक समरसता और एकात्मता को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। ये रहेंगे कार्यक्रम में मौजूद 30 सितंबर को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती मुख्य अतिथि के रूप में आशीर्वचन देंगे। चंपत राय मुख्य वक्ता होंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता राजकुमार लोहिया करेंगे। विहिप पदाधिकारियों के अनुसार, जन्मशताब्दी वर्ष के आयोजनों के जरिए अशोक सिंघल के विचारों और जीवन-दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा सनातन संस्कृति के प्रति गौरवबोध जागृत करने का प्रयास किया जाएगा।

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