कानपुर में रंगदारी केस में सुरेश पाल की जिरह पूरी:कहा- SIT ने दबाव डालकर सादे कागज पर साइन कराया, अखिलेश दुबे ने पैसा नहीं मांगा
कानपुर में ढाई करोड़ रुपये रंगदारी मामले में वादी होटल कारोबारी सुरेश पाल की जिरह मंगलवार को खत्म हो गई। अब 1 अक्टूबर को अभियोजन अगला गवाह पेश करेगा। सुरेश ने अपनी जिरह के दौरान पूछे गए सवालों में SIT पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जिरह के दौरान अभियोजन के सवालों पर सुरेश ने कहा कि उस पर पुलिस के बड़े अफसरों का भारी दबाव था। वह दिल्ली में इलाज कर रहा था अचानक उसे फोन करके कानपुर बुलाया गया। नौबस्ता में दर्ज पाक्सो के मुकदमे को दोबारा खोलकर उसमें जेल भेजने की धमकी दी गई और धमकाकर पुलिस अफसरों ने उससे सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। सुरेश पाल बोले- पुलिस ने बयान कैसे लिखे जानकारी नही उन पर क्या लिखा था डर के कारण पढ़ भी नहीं सका। अखिलेश ने उससे कभी कोई रंगदारी नहीं मांगी लवी को तो वह जानता भी नहीं है। उसने मजिस्ट्रेट के सामने बयान भी SIT के दबाव में दिए थे और अब न्यायालय में सही बयान दे रहा है। जब उससे वृंदावन और प्रयागराज में संपत्तियां बेचकर रंगदारी की रकम चुकाने से संबंधित सवाल पूछा गया तो उसने कहा कि संपत्तियां उसने अपनी व्यावसायिक जरूरत के लिए बेची थीं। उसका रंगदारी से कोई लेना देना नहीं था। उसने पुलिस को कभी कोई बयान नहीं दिए उसके बयान पुलिस ने कैसे लिखे उसे जानकारी नहीं है और जहां भी उसके हस्ताक्षर बनवाए गए वह उसने पुलिस के दबाव में बनाए। सुरेश के मुकदमे की सुनवाई जिला जज अनमोल पाल की अदालत में चल रही है। मंगलवार को सुरेश वीडियो कांफ्रेंसिंग से हाजिर हुए। कार्यवाहक डीजीसी ओंकारनाथ वर्मा ने उनसे जिरह की। उनकी जिरह खत्म होने के बाद कोर्ट ने खुद भी सुरेश से कुछ सवाल पूछे। इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी सुरेश से जिरह की। तीन तारीखों से चल रही सुरेश की जिरह आखिर खत्म हो गई। अभियोजन अब 1 अक्टूबर को अपना अगला गवाह कोर्ट में पेश करेगा। 250 पेज की पुलिस ने दाखिल की थी चार्जशीट होटल कारोबारी सुरेश पाल ने 7 अगस्त 2025 को किदवई नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि वर्ष 2022 में अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उसके साथी आयुष मिश्रा उर्फ लवी ने उन्हें रेप के फर्जी मुकदमे में फंसाया और मुकदमे से बचाने के लिए ढाई करोड़ रुपए की रंगदारी वसूली। मामले में पुलिस ने अखिलेश और आयुष को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस ने 250 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इसी मुकदमे की सुनवाई जिलाजज की कोर्ट में चल रही है। अब पढ़िए कोर्ट में क्या सवाल–जवाब हुए सवाल- आपके बेटे पुष्पेंद्र की अखिलेश दुबे से बात हुई थी, जिसकी कुल 8 कॉल रिकॉर्डिंग हुई थी। वह कॉल रिकॉर्डिंग आप द्वारा विवेचक को दी गयी थी ? जवाब- कोई कॉल रिकॉर्डिंग नहीं दी थी। सवाल- तब वह कॉल रिकॉर्डिंग किस प्रकार विवेचक के पास पहुंची? जवाब- मुझे उसकी कोई जानकारी नाहीं है। सवाल- मेरा यह कहना है कि यह आठ कॉल रिकॉर्डिंग मार्च 2022 से मई 2025 के बीच की है। इस बारे में आपका क्या कहना है? जवाब - मुझे नहीं मालूम। सवाल- मेरा यह कहना है कि यह कॉल रिकॉर्डिंग थाना नौबस्ता में आपके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के मुकदमें दर्ज होने के बाद उसे खत्म कराने के संबंध में की गयी वार्ता से संबंधित है। इस बारे मे आपका क्या कहना है? जवाब- मुझे नहीं मालूम। सवाल- कानपुर शहर के अतिरिक्त आपके और कहां-कहां होटल है? जवाब- कानपुर के अतिरिक्त मेरे कही और अभी होटल नहीं है। सवाल- ये जानकारी आपको फोन के जरिए से हुई थी, एक अनजान नंबर से आपके पास फोन आया था। जवाब- जी, लेकिन मुझे फोन नंबर याद नहीं है। सवाल- उस फोन से फोन करने वाले ने आपको क्या बताया था? जवाब- फोन करने वाले ने बताया था कि आपके ऊपर मुकदमा हुआ है, नौबस्ता थाने में। सवाल - मेरा यह कहना है कि इस बयान के अंश में जो तिथियां आयी है वे आप द्वारा विवेचक को बताने पर ही पता चली होगी अपने आप से विवेचक तिथियां नहीं लिख सकते ? जवाब- मैने नहीं बतायी। सवाल- जमानत आवेदन के विरोध में आपने काउंट शपथपत्र भी दाखिल किया था। इस बारे में आपका क्या कहना है? जवाब- मुझे पुलिस ले गयी थी, फोटो खिंचवाया था, कुछ वकालतनामा और सादे कागजों पर दस्तखत कराए थे। सवाल- सुप्रीम में भी जाकर आपने आपत्ति और शपथपत्र दाखिल किया था। इस बारे में आपका क्या कहना है? जवाब- मैं नहीं गया था। सवाल- मेरा यह कहना है कि आज आप सही बात न्यायालय में नहीं बता रहे हैं ? जवाब- आज मैं न्यायालय में सही बात बता रहा हूं। मेरे खिलाफ थाना नौबस्ता में जो मुकदमा पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ था उसमें पुलिस ने मेरा बयान नहीं लिया था। सवाल- आपके प्रतिपरीक्षा में यह बात आयी है कि अखिलेश शुक्ला व राजेश कुकरेजा के बीच लेन–देन के विवाद के कारण अखिलेश शुक्ला ने आपके खिलाफ पॉक्सो एक्ट का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया, लेकिन यह बात न तो आपकी तहरीर और न ही मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में आयी है। इस बारे में आपका क्या कहना है? जवाब- यह कहना सही है। सवाल- आपने अपने बयान में कहा है कि जिस महिला ने पॉक्सो एक्ट का मुकदमा आपके खिलाफ लिखवाया उसे आप नहीं जानते। इससे यह स्पष्ट होता है कि कोई अन्य व्यक्ति मुकदमा लिखवाने के पीछे था। इस बारे में आपका क्या कहना है? जवाब- मैं नही जानता। सवाल– साक्षी को उसके दिए बयान "फिर 2022 में व्हाटसप कॉल आयी अखिलेश दुबे की उनके पास मिलने के लिए गया" पढ़कर सुनाया गया और पूछा गया कि इस बयान के बारे में आपका क्या कहना है? जवाब- मैने पुलिस को कोई बयान नहीं दिया। पुलिस ने अपने मन से मेरे नाम से गलत बयान लिख लिया। यह कहना गलत है कि मैं न्यायालय में झूठी गवाही दे रहा हूं। सवाल- पॉक्सो एक्ट का जो आपके ऊपर मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन वह मुकदमा झूठा था इसीलिए यह मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस बारे में आपका क्या कहना है? जवाब- यह कहना गलत है। SIT ने कहा था कि अखिलेश दुबे का नाम लो। सवाल- आज आप कोर्ट में सही बात नहीं बता रहे हैं और झूठी गवाही दे रहे हैं। जवाब- आज मैं न्यायालय में सही बात बता रहा हूं। सवाल- आप अभियुक्तगण से मिलकर और उनके प्रभाव और दबाव के कारण कोर्ट में सही बात नहीं बता रहे हैं। जवाब- यह कहना गलत है। मैं कोर्ट में आज सही बात बता रहा हूं।
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