कानपुर में श्रीराम कथा:समझाया स्वर्ण का अर्थ, सुंदरकांड प्रसंगों से भूख, संतवाणी और भक्ति का महत्व बताया
कानपुर में रामलीला सोसाइटी द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के स्वर्ण जयंती वर्ष के प्रथम दिन दीदी मां मंदाकिनी ने श्रीरामचरितमानस के माध्यम से 'स्वर्ण' और 'भूख' की सुंदर व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने सुंदरकांड का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि हनुमान जी ने अशोक वाटिका में माता सीता से कहा था- "सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा।" दीदी मां ने कहा कि भूख केवल शारीरिक नहीं, बल्कि एक विश्वव्यापी समस्या है। इसी भूख (लालसा) के कारण राजा प्रतापभानु वन में जाकर राक्षस बन गए। दूसरी ओर, सीता जी की खोज में निकले भूखे-प्यासे वानरों को जब हनुमान जी जैसे संत का सानिध्य मिला, तो गुफा में तपस्विनी स्वयंप्रभा के दर्शन हुए और फल-जल की प्राप्ति हुई। यह संत की वाणी पर विश्वास का ही फल था। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम की बाललीला और वनवास में भी उनकी भूख का वर्णन मिलता है, जब उन्होंने माता शबरी के दिए फल बड़े प्रेम से ग्रहण किए थे। कथा के इस मार्मिक प्रसंग का राजीव गर्ग, पवन गर्ग, कमल किशोर अग्रवाल, आलोक अग्रवाल और राजीव अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद लिया।
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