कई पितृपक्ष गुजरे, अपनों की राह देख रहीं अस्थियां:कानपुर में अस्थि कलश बैंक के लॉकर में रखी हैं, सालों से विसर्जन का इंतजार
पितृपक्ष में लोग अपने पूर्वजों को याद करने के लिए घाटों पर तर्पण करते हैं। घरों में पूजा होती है, भोज कराया जाता है। लेकिन कानपुर में भैरव घाट के विद्युत शवदाह गृह में एक ऐसा लॉकर भी है, जहां दो दर्जन से ज्यादा अस्थियां अपने लोगों के लौटने का इंतजार कर रही हैं। किसी को यहां रखे महीनों बीत चुके हैं तो कुछ अस्थियां सालों से अंतिम विदाई की राह देख रही हैं। वैसे तो गंगा किनारे बसे कानपुर में अस्थि विसर्जन दाह संस्कार के अगले दिन ही हो जाता है। लेकिन अपनों की बेरुखी के चलते कलश में रखी अस्थियां विसर्जन के इंतजार में हैं। मिट्टी के कलश में कैद है अधूरी अंतिम यात्रा युग दधीचि देहदान संस्थान की ओर से संचालित अस्थि कलश बैंक के लॉकर में मिट्टी के कई कलश रखे हैं। अंतिम संस्कार के बाद इन अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया जाना था, लेकिन अपनों के न पहुंचने से यह प्रक्रिया अधूरी रह गई। वक्त बीतता गया और कलश वहीं रखे रह गए। कई पितृपक्ष आए, मगर इंतजार खत्म नहीं हुआ जिन दिनों शहर के घाटों पर लोग अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धा से जल चढ़ाते हैं, उन्हीं दिनों इन कलशों की खामोशी और ज्यादा मार्मिक हो जाती है। कई बार पितृपक्ष आया और चला गया, लेकिन इन अस्थियों को लेकर जाने वाला कोई अपना नहीं पहुंचा। महीनों से रखे कुछ कलश अब सालों का इंतजार झेल चुके हैं। एक कलश, एक परिवार और एक अधूरी विदाई लॉकर में रखे हर कलश के पीछे किसी की जिंदगी की कहानी है। किसी परिवार का सदस्य, किसी का जीवनसाथी, किसी का माता-पिता या कोई अपना... अंतिम संस्कार के बाद बची अस्थियां अब भी उसी परिवार के किसी सदस्य के आने की प्रतीक्षा में हैं। 30 दिन रखने का है प्रावधान अस्थि कलश बैंक के संचालक मनोज सेंगर ने बताया कि अस्थि कलश बैंक उन लोगों के लिए हैं, जिनके अपने कुछ समय बाद विसर्जन करना चाहते हैं या फिर किसी विशेष स्थान पर। रखते समय बता दिया जाता है कि 30 दिनों तक अस्थियों को रखा जाएगा। कुछ लोग तो अस्थि कलश ले जाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं, जो कि सालों बीतने के बाद भी अस्थियां लेने नहीं आए। समय समय पर वहां पूजन आदि कराया जाता है।
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