खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर की खेती को मिलेगा बढ़ावा:क्लस्टर आधारित बागवानी से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, योजनाओं के लक्ष्य मंजूर
जालौन में किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी को नई दिशा देने के लिए खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर जैसी अपरंपरागत फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही अदरक, हल्दी, शिमला मिर्च, बैंगन और टमाटर जैसी नकदी एवं मसाला फसलों की खेती भी प्रोत्साहित की जाएगी। जिलाधिकारी समीर ने गुरुवार शाम 4:30 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में जिला औद्यानिक मिशन समिति, जनपद स्तरीय क्रियान्वयन समिति और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना समिति की बैठक में अधिकारियों को इसके निर्देश दिए। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभागीय योजनाओं के भौतिक और वित्तीय लक्ष्यों का अनुमोदन किया गया। डीएम ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए और निर्धारित लक्ष्य समय से पूरे किए जाएं। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, खजूर, नींबू-मुसम्मी, अनार, पपीता, आंवला और कटहल सहित विभिन्न बागवानी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। शाकभाजी, प्याज, लहसुन, मसाला फसलों के साथ मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र, स्प्रेयर, मचान और मल्चिंग जैसी सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।
डीएम ने कहा कि स्थानीय जलवायु के अनुकूल और बाजार में मांग वाली फसलों का चयन प्राथमिकता से किया जाए। योजनाओं को क्लस्टर के रूप में संचालित करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इससे अधिक किसानों को जोड़ा जा सकेगा और सामूहिक उत्पादन व विपणन से आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। बैठक में बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र में औद्यानिक विकास योजना के तहत 50 हेक्टेयर, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ कार्यक्रम के तहत 3,400 हेक्टेयर और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत 861 इकाइयों की स्थापना के लक्ष्य पर चर्चा हुई। बताया गया कि योजना के तहत पात्र इकाइयों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की 35 प्रतिशत अनुदान सहायता का प्रावधान है। डीएम ने अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के अधिक से अधिक किसानों को योजनाओं से जोड़ने के साथ महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने जैविक खेती को प्रोत्साहित करने और बीज व रोपण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने औद्यानिक उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और रोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा। औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों और किसानों के बीच संवाद कराने के भी निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी ने हाईटेक नर्सरी का जल्द संचालन सुनिश्चित कर किसानों को गुणवत्तापूर्ण शाकभाजी पौधे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी ए.के. सिंह, जिला कृषि अधिकारी जीडी सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
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