खतरे के निशान से 77 सेमी ऊपर सरयू:बाराबंकी में 1100 साल पुराने मंदिर तक पहुंची कटान, बचाने की आस में श्रद्धालु कर रहे पूजा
बाराबंकी के रामनगर तहसील के हेतमापुर में सरयू नदी का रौद्र रूप लगातार जारी है। मंगलवार दोपहर 2 बजे नदी खतरे के निशान से 77 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। तेज बहाव के साथ नदी किनारों पर लगातार कटान कर रही है। अब कटान की जद करीब 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर तक पहुंच गई है। मंदिर पर मंडराते खतरे को देखकर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है। मंदिर को सुरक्षित बचाने की उम्मीद में मंगलवार दोपहर से श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी। मंदिर परिसर में जुटे लोग भगवान से मंदिर की रक्षा की प्रार्थना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन अपने स्तर पर बचाव कार्य कर रहा है, लेकिन अब उन्हें भगवान से भी मंदिर के सुरक्षित रहने की उम्मीद है। मंदिर से आगे नहीं बढ़ती थीं सरयू की लहरें बाबा नारायण दास मंदिर करीब 1100 साल पुराना बताया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के दौरान सरयू की लहरें मंदिर से आगे नहीं बढ़ती थीं। इस बार नदी का बहाव और कटान बेहद तेज है। नदी लगातार मंदिर के किनारे की जमीन को काट रही है, जिससे ऐतिहासिक मंदिर के अस्तित्व को लेकर चिंता बढ़ गई है। 40 से ज्यादा मकान और टेलीफोन एक्सचेंज नदी में समाए हेतमापुर में सरयू की कटान पहले ही भारी तबाही मचा चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 150 साल पुरानी मस्जिद नदी की धारा में समा चुकी है। इसके अलावा अब तक 40 से ज्यादा मकान और टेलीफोन एक्सचेंज भी नदी की चपेट में आ चुके हैं। ग्रामीण बताते हैं कि जिन आंखों के सामने घर और धार्मिक स्थल नदी में समाते देखे हैं, अब वही आंखें बाबा नारायण दास मंदिर की ओर टिकी हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर को बचाने के लिए वे पूजा-पाठ कर रहे हैं और भगवान से इसकी रक्षा की प्रार्थना कर रहे हैं। एक सप्ताह से दिन-रात बचाव कार्य इधर, बाढ़ खंड विभाग और जिला प्रशासन करीब एक सप्ताह से दिन-रात बचाव कार्य में जुटा है। मंदिर और आसपास के घरों को कटान से बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन की टीमें नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अब मंदिर को बचाने की चुनौती हेतमापुर में इस समय सबसे बड़ी चुनौती बाबा नारायण दास मंदिर को सरयू की तेज धार से बचाने की है। फिलहाल ग्रामीणों की नजर नदी के जलस्तर, लगातार हो रहे कटान और प्रशासन के बचाव कार्य पर टिकी हुई है।
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