किसान मेले में ई-टैक्टर को देखने उमड़ी भीड़:मिलेट्स का रसगुल्ला-लाल भिंडी की चर्चा, हाईटेक उपकरण और उन्नत बीजों की जमकर खरीददारी

Oct 16, 2026 - 19:28
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किसान मेले में ई-टैक्टर को देखने उमड़ी भीड़:मिलेट्स का रसगुल्ला-लाल भिंडी की चर्चा, हाईटेक उपकरण और उन्नत बीजों की जमकर खरीददारी
कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में राष्ट्रीय किसान मेले के दूसरे दिन भी किसानों के साथ ही पब्लिक की भारी भीड़ देखने को मिली। मेले में दूसरे दिन पहुंचा ई-ट्रैक्टर किसानों के बीच आकर्षण का केन्द्र बना रहा। बगैर डीजल के 6 से 7 घंटे वाले ट्रैक्टर की खासियत से लेकर कीमत जानने को लेकर किसान आतुर दिखे। इसके साथ ही खेती में इस्तेमाल होने वाले ई-थ्रेसर और सोलर उपकरण किसानों के बीच चर्चा का केन्द्र बना रहा। वहीं, दूसरी तरफ सीएसए समेत अन्य कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से विकसित किए गए लाल भिंडी, बैंगनी आम, मिलेट्स का रसगुल्ला और उन्नत किस्म के बीज किसानों के बीच चर्चा का केन्द्र बने रहे। ई-ट्रैक्टर एक बार में 5 से 7 घंटे तक करता है काम चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय राष्ट्रीय किसान मेले का आयोजन चल रहा है। मेले में 150 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टालों में खेती किसानी से जुड़े उन्नत बीज से लेकर आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। इतना ही नहीं किस तरह से पोल्ट्री फॉर्मिंग या फिर डेरी फॉर्म शुरू करके लाखों रुपए महीने कमा सकते हैं। इसकी भी जानकारी मेले में दी जा रही है। मेले के दूसरे दिन भी भारी भीड़ देखने को मिली। मेले में आया ई-ट्रैक्टर और ई-थ्रेसर किसानों के बीच चर्चा का केन्द्र बना रहा। कंपनी ने दावा किया कि भारत का पहला ई-ट्रैक्टर है। 6.50 लाख की कीमत का यह इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर छह से सात घंटे तक चलता है। इसके बैट्री की 9 साल की लाइफ का दावा कंपनी कर रही और 5 साल तक की गारंटी दे रही है। ट्रैक्टर के साथ ही ट्रॉली, रीपर, रोटावेटर, वाटर पंप, आर्थ ऑगर समेत अन्य उपकरण भी हैं। जो ट्रैक्टर के साथ ही खेती में काम आते हैं। किचन गार्डन या पहाड़ों पर खेती के लिए मिनी ट्रैक्टर इस दौरान किसान मेले में दो तरह के ई-ट्रैक्टर देखने को मिले। अगर किसी ने छोटी जोत वाले जगह पर किचन गार्डन डेवलप कर रखा है या फिर पहाड़ों में खेती के लिए कंपनी ने एक बेहद छोटा ट्रैक्टर भी लांच कर दिया है। इससे छोटी जगह पर आसानी से जुताई की जा सकती है। सोलर थ्रेशर भी किसान मेले में पहुंचा किसान मेले में ई-थ्रेशर भी पहुंचा है। कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि यह बैट्री से चलित थ्रेशर है। इसका उपयोग गेहूं, धान, दालों और अन्य फसलों से दाने अलग करने में किया जाता है। इसके उपयोग से खेती का बजट बेहद कम हो जाता है। एक बार चार्ज करने पर यह छह से आठ घंटे तक काम करता है। लाल भिंडी और बैंगनी आम की चर्चा रही आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्विवद्यालय के वैज्ञानिकों ने आम, जल्दी की विभिन्न प्रजातियों का प्रदर्शन किया। जिसमें बैंगनी आम देने वाली प्रजाति अंबिका और लाल भिंडी की सर्वाधिक चर्चा का विषय बनी रही। मिलेट्स के बिस्किट और कुकीज लोगों को पसंद आए किसान मेले में सीएसए के मिलेट्स डिपार्टमेंट की ओर से एक स्टॉल लगाया गया। यहां पर मिलेट्स से बने बिस्किट, कुकीज और कई खाद्य सामग्री की प्रदर्शनी में लगाया गया। इसे लोगों ने जमकर खरीदा और पसंद किया। आधुनिक कृषि यंत्रों से उन्नत खेती के गुर सिखाए किसान मेले में आधुनिक कृषि उपकरणों का सबसे बड़ा बाजार दिखा। इसे देखने के लिए किसानों की भीड़ लगी रही। इन उपकरणों के जरिए किसान अपनी खेती को आसान कर सकते हैं। कई जिलों से आए किसानों ने उपकरण जमकर खरीदे। मक्के और बाजरे की नई किस्म बाजार में पहुंची मेले में मक्के और बाजरे के साथ अन्य फसलों की नई किस्म के बीजा भी मेले में मौजूद हैं। इसे किसान जमकर खरीद रहे हैं। खास बात ये है कि अब मक्के को 12 महीने की खेती कर सकते हैं। मिलेट्स की बाजार में डिमांड बढ़ने के बाद से मक्का, बाजरा समेत अन्य मोटे अनाज की खेती से किसान लाखों रुपए कमा रहे हैं। दुनिया का पहला सोलर थ्रेसर विकल्प स्टार्टअप के फाउंडर अनंत चतुर्वेदी ने बताया कि यह भारत नहीं दुनिया का पहला सोलर थ्रेसर है। मेरा लक्ष्य है कि पूरी खेती को डीलज, पेट्रोल वाले उपकरणों से मुक्त कर दिया जाए। इससे कि किसानों की आय में बंपर बढ़ोत्तरी हो। सोलर थ्रेसर से किसानों की आमदनी में काफी इजाफा हुआ है। उद्यानिकी में रूफ टॉप मॉडल रहा आकर्षण का केंद्र चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में आयोजित किए जा रहे उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के अंतर्गत आज महिला सशक्तिकरण पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। सत्र का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करना, उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ना तथा आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक, कुलपति, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर रहे, जबकि अध्यक्षता डॉ. संजीव गुप्ता, कुलपति, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर ने की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती नीलिमा कटियार, विधायक, कल्याणपुर, कानपुर; डॉ. विजय रत्ना तोमर, ब्लॉक प्रमुख, सरसौल; डॉ. सीमा सोनकर, अधिष्ठाता, गृह विज्ञान महाविद्यालय तथा डॉ. कौशल कुमार, अधिष्ठाता, कृषि संकाय उपस्थित रहे। किसान मेले के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी, निदेशक प्रसार एवं अधिष्ठाता, उद्यान संकाय भी मंचासीन रहे। सीएसए और सीएसजेएमयू के बीच होगा एमओयू कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.विनय कुमार पाठक ने अपने संबोधन में बताया कि दोनों विश्वविद्यालय के मध्य शीघ्र ही एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के माध्यम से दोनों विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में परस्पर सहयोग को बढ़ावा देते हुए अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण तथा नवीन तकनीकों के हस्तांतरण की दिशा में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल देते हुए कहा कि महिलाओं को कृषि आधारित उद्यमिता, कौशल विकास एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि वे परिवार एवं समाज के विकास में भी अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी। महिला कृषकों ने भी बढ़चढ़ कर लिया हिस्सा कार्यक्रम में विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में महिला कृषकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इस अवसर पर कृषि एवं कृषि से संबद्ध गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका, कृषि आधारित आजीविका के अवसर, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, पोषण वाटिका, उद्यमिता विकास तथा कृषि उत्पादों के विपणन के माध्यम से महिलाओं की आय में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. संजीव गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित अंत्योदय योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ महिलाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को विभिन्न योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने, कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने, वित्तीय सहायता से जोड़ने तथा उनके उत्पादों के लिए उपयुक्त बाजार उपलब्ध कराने से उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से महिला कृषकों को आवश्यक वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। निदेशक प्रसार डॉक्टर वी के त्रिपाठी ने बताया कि बड़ी संख्या में कानपुर के विभिन्न स्कूलों के छात्र छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया तथा विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों को जाना आज मेले में साढ़े आठ हजार से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।इस अवसर पर डॉ. विजय रत्ना तोमर, ब्लॉक प्रमुख, सरसौल ने संदेश दिया गया कि महिला सशक्तिकरण कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि का एक महत्वपूर्ण आधार है। महिलाओं को वैज्ञानिक तकनीकों, प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधनों एवं बाजार से जोड़कर न केवल उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है, बल्कि कृषि को अधिक टिकाऊ, समावेशी एवं लाभकारी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।

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