कन्नौज में ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बैठे युवक की करंट से मौत:झूलते बिजली तार की चपेट में आया, परिजनों ने मुआवजे की मांग की
कन्नौज में ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बैठकर भागवत कथा का सामान लेकर जा रहे मजदूर की झूलते बिजली तार की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसा शुक्रवार को सदर कोतवाली की कुसुमखोर चौकी क्षेत्र के राजापुरवा गांव में हुआ। 11 हजार वोल्ट की लाइन की चपेट में आने से 42 वर्षीय सुखदेव लोधी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद परिजन और ग्रामीण मुआवजे की मांग को लेकर जिला अस्पताल में धरने पर बैठ गए। शुक्रवार दोपहर 3 बजे तक कोई अधिकारी उनका हाल जानने नहीं पहुंचा। परिजनों ने बिजली विभाग के अधिकारी से मुआवजे का आश्वासन मिलने तक पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। राजापुरवा निवासी सुखदेव लोधी पुत्र श्रीपाल ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बैठकर गांव में होने वाली भागवत कथा के लिए सामान लेकर आ रहे थे। इसी दौरान ऊपर से गुजर रहे झूलते बिजली तार की चपेट में आ गए। करंट लगने से उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। सूचना पर कुसुमखोर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और सुखदेव को जिला अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 5 बच्चों के पालन-पोषण की चिंता मृतक के पारिवारिक भाई प्रवीण कुमार ने बताया कि परिवार गरीब और भूमिहीन है। सुखदेव की मौत के बाद उसके पांच बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी परिवार के सामने बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने कहा कि जब तक बिजली विभाग के अधिकारी मुआवजे का आश्वासन नहीं देते, तब तक परिवार पोस्टमार्टम नहीं कराएगा। वहीं, सबका दल यूनाइटेड के जिलाध्यक्ष नीरज लोधी ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण गांव में 11 हजार वोल्ट की लाइन करीब 10 फीट की ऊंचाई पर झूल रही है। इसी वजह से हादसा हुआ। भागवत कथा के लिए सामान लेकर आ रहा था सुखदेव राजापुरवा गांव के हरदेव बाबा मंदिर में ग्राम समाज की ओर से शुक्रवार को भागवत कथा का आयोजन होना था। सुखदेव भी कार्यक्रम की तैयारियों में जुटा था। वह ट्रैक्टर-ट्रॉली पर कथा के लिए सामान लेकर आ रहा था, तभी हादसा हो गया। सुखदेव की मौत के बाद भागवत कथा का कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया। 5 भाइयों के बीच सिर्फ डेढ़ बीघा जमीन प्रवीण कुमार के मुताबिक, सुखदेव पांच भाइयों में दूसरे नंबर का था। उसके भाइयों के नाम विष्णु, मनोज, सतेंद्र और जितेंद्र हैं। पांचों भाइयों के बीच करीब डेढ़ बीघा खेती की जमीन है। इतनी कम जमीन से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल है। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए बाकी भाई भी मजदूरी करते हैं। सुखदेव की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट और गहरा गया है।
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