60 के पार पहुंची प्याज, त्योहारों से पहले बढ़ी रसोई की चिंता

त्योहारों से पहले प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात और कमजोर मानसून के कारण प्याज की कीमत पिछले साल के मुकाबले करीब दोगुनी हो गई है। 30 रुपये किलो बिकने वाली प्याज अब 60 रुपये किलो के पार पहुंच गई है। दाल, चावल और चीनी जैसी जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है।

Oct 01, 2026 - 15:31
0
60 के पार पहुंची प्याज, त्योहारों से पहले बढ़ी रसोई की चिंता

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 1 अक्टूबर 2026

त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात और कमजोर मानसून के कारण प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। पिछले साल करीब 30 रुपये किलो बिकने वाली प्याज अब कई जगहों पर 60 रुपये किलो के पार पहुंच गई है। इसके साथ ही दाल, चावल और चीनी जैसी जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की बात सामने आ रही है।

महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों पर सूखे का असर

महाराष्ट्र देश में प्याज के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में शामिल है और देश के कुल प्याज उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत बताई जाती है। राज्य के कई हिस्सों में इस वर्ष बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इसका सीधा असर प्याज की पैदावार और बाजार में उपलब्धता पर पड़ने की आशंका है। यही वजह है कि पिछले साल की तुलना में प्याज की कीमतों में करीब दोगुनी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।करीब 30 रुपये किलो बिकने वाली प्याज अब कई बाजारों में 60 रुपये किलो के आसपास या उससे अधिक कीमत पर पहुंच गई है। त्योहारों के दौरान घरों में खाद्य सामग्री की मांग बढ़ने के कारण कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। प्याज भारतीय रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। आने वाले दिनों में आपूर्ति और मौसम की स्थिति कीमतों की दिशा तय कर सकती है।

कमजोर मानसून से खाद्य वस्तुओं पर दबाव

कमजोर मानसून का असर केवल प्याज तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। देश के कई कृषि उत्पादक क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रहने के कारण दाल, चावल और चीनी जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव देखा जा रहा है। कृषि उत्पादन काफी हद तक वर्षा पर निर्भर रहने के कारण बारिश की कमी से फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। इससे बाजार में उपलब्धता घटने पर कीमतें बढ़ने की स्थिति बन सकती है।अगस्त के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सितंबर में भी कई जरूरी खाद्य पदार्थों के दामों में अस्थिरता बनी रहने की बात सामने आई है। कमजोर बारिश और कुछ इलाकों में सूखे जैसे हालात को इसकी प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। त्योहारी मांग बढ़ने के साथ यदि आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो महंगाई का असर घरेलू खर्च पर और दिखाई दे सकता है।

देश के लगभग आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात

सितंबर 2026 के अंत तक देश के 49.4 प्रतिशत से अधिक हिस्से में सूखे जैसी स्थिति होने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। यह स्थिति पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अधिक व्यापक बताई गई है। वर्ष 2023 में देश का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सूखे की चपेट में था, जबकि इस वर्ष सितंबर के अंत तक यह आंकड़ा करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। इनमें करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ऐसा भी बताया गया है जहां स्थिति अधिक गंभीर है।बारिश की कमी का असर सीधे कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। खरीफ फसलों के लिए मानसूनी बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है और बारिश कम होने पर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। यदि फसल उत्पादन में कमी आती है तो आने वाले महीनों में कई खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर मंडियों से लेकर खुदरा बाजार तक कीमतों के रूप में दिखाई दे सकता है।

महाराष्ट्र और पंजाब में भी गंभीर स्थिति

महाराष्ट्र के करीब 84 प्रतिशत हिस्से में सूखे जैसे हालात होने की बात सामने आई है। वहीं पंजाब के करीब 80 प्रतिशत हिस्से में भी ऐसी स्थिति बताई गई है। महाराष्ट्र में 358 में से 265 तालुकों को सूखे से प्रभावित बताया गया है, जो राज्य के करीब 74 प्रतिशत हिस्से के बराबर है। इनमें लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा अधिक गंभीर सूखे की स्थिति से प्रभावित बताया गया है।महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति प्याज जैसी प्रमुख फसलों के लिए चिंता का विषय है। राज्य में प्याज की खेती बड़े पैमाने पर होती है और उत्पादन में किसी भी तरह की कमी का असर देशभर के बाजार पर पड़ सकता है। यदि नई फसल की आवक कमजोर रहती है तो प्याज की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इससे त्योहारों के दौरान आम परिवारों के मासिक खर्च में और बढ़ोतरी हो सकती है।

2015 के बाद मानसून में सबसे बड़ी कमी का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लंबे समय के औसत की तुलना में इस मानसून में करीब 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसे वर्ष 2015 के बाद मानसून में दर्ज हुई बड़ी कमी बताया गया है। बारिश की कमी से खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। हालांकि अंतिम असर फसल की स्थिति, सिंचाई व्यवस्था और आने वाले मौसम पर निर्भर करेगा।कम बारिश के साथ कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बनने से कृषि क्षेत्र के सामने चुनौती बढ़ गई है। प्याज, दाल और चावल जैसी जरूरी वस्तुओं के उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। त्योहारी मौसम में मांग बढ़ने के कारण बाजार में कीमतों का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में मंडियों में आवक और खुदरा कीमतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

आम लोगों की रसोई पर बढ़ा असर

प्याज की कीमतों में तेजी का सीधा असर आम परिवारों की रसोई के बजट पर पड़ता है। रोजमर्रा के भोजन में इस्तेमाल होने वाली प्याज के दाम बढ़ने से महीने के घरेलू खर्च में अतिरिक्त बोझ जुड़ जाता है। त्योहारी मौसम में पहले से ही खाद्य और अन्य जरूरी सामानों पर खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में प्याज समेत दूसरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।फिलहाल कीमतों में आगे कितनी तेजी या राहत मिलेगी, यह प्याज की आपूर्ति, नई फसल की आवक और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि बारिश की स्थिति में सुधार नहीं होता और उत्पादन प्रभावित रहता है तो बाजार में कीमतों का दबाव बना रह सकता है। दूसरी ओर, मंडियों में आवक बढ़ने पर कीमतों में राहत मिलने की संभावना बन सकती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User