मां कामाख्या धाम में दर्शन को उमड़ी भीड़:9 दिनों में 20 लाख भक्तों के पहुंचने का अनुमान
शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को सुनवा गांव के पास आदि गंगा गोमती नदी के तट पर घने जंगलों के बीच स्थित सिद्धपीठ मां कामाख्या भवानी मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।सुबह 4बजे से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। प्राचीन मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था के चलते यहां स्थानीय ही नहीं,आसपास के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। शहरी आबादी से दूर निर्जन क्षेत्र और घने जंगलों के बीच स्थित मां कामाख्या धाम अपनी प्राचीन मान्यताओं और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। अयोध्या के अलावा अमेठी,सुल्तानपुर,गोंडा, बस्ती, बाराबंकी,बलरामपुर और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों के श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर से जुड़ी तमाम लोककथाएं और देवी मां के चमत्कारों की मान्यताएं भक्तों की आस्था को और मजबूत करती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धपीठ कामाख्या धाम का संबंध दुर्गा सप्तशती में वर्णित राजा सुरथ और वैश्य की तपस्या से जोड़ा जाता है।मान्यता है कि यहां तपस्या करने पर देवी ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए थे।मंदिर में मां काली, माता सरस्वती और माता लक्ष्मी पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ माता के दरबार में माथा टेकते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। मंदिर के पुजारी इंद्रेश कौशिक ने बताया कि नवरात्र में माता के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। उनके अनुसार,नौ दिनों में करीब 20 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि मां अपने भक्तों का सदैव कल्याण करती हैं और श्रद्धालु इसी विश्वास के साथ दरबार में आते हैं। मां कामाख्या धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ सुविधाओं का भी विस्तार हो रहा है। पहले यहां भक्तों के बैठने और विश्राम करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी,लेकिन स्थानीय लोगों और सरकार की पहल से मंदिर परिसर में विकास कार्य धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं।नवरात्र के दौरान भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में बेहतर सुविधाओं की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
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