MBBS काउंसलिंग मामले में अधिकारी तलब:हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा को पेश होने का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एमबीबीएस काउंसलिंग में आरक्षण से जुड़े एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। उनसे पूछा गया है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का कितना पालन किया गया। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश यूथ फॉर इक्वलिटी फाउंडेशन की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों—अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर—में आरक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया गया है। पूर्व में विशेष अपील पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 की काउंसलिंग में हस्तक्षेप नहीं करने का अनुरोध किया था। सरकार ने आश्वासन दिया था कि वर्ष 2026-27 से इन कॉलेजों में एससी आरक्षण 21 प्रतिशत की वैधानिक सीमा के अनुसार लागू किया जाएगा। इसी आश्वासन के आधार पर कोर्ट ने उस समय दाखिला प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया था। हालांकि, मौजूदा सुनवाई में याची की ओर से कहा गया कि सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया में नहीं किया। आरोप लगाया गया कि अनुपालन केवल उन चार मेडिकल कॉलेजों तक सीमित रखा गया, जो मूल याचिका में शामिल थे। याची की ओर से यह भी बताया गया कि दूसरे चरण की काउंसलिंग में इन चारों कॉलेजों को बाहर कर दिया गया, जबकि कोर्ट के आदेश का प्रभाव सभी संबंधित कॉलेजों और सीटों पर होना चाहिए था। इन दलीलों के बाद कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा को तलब करते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश दिया है।
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