मेरठ में 4 श्रद्धालुओं की मौत के बाद आक्रोश:कांवड़ पटरी मार्ग पर घरवालों ने लगाया जाम, 10 लाख रुपए मुआवजा मांगा

Oct 12, 2026 - 14:12
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मेरठ में 4 श्रद्धालुओं की मौत के बाद आक्रोश:कांवड़ पटरी मार्ग पर घरवालों ने लगाया जाम, 10 लाख रुपए मुआवजा मांगा
सहारनपुर के देवबंद में सड़क हादसे में कुशावली गांव के चार श्रद्धालुओं की मौत के बाद पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद नहीं मिलने से ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। सोमवार को ग्रामीणों ने हादसे में घायल युवकों को साथ लेकर चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग स्थित अटेरना गंगनहर पुल पर जाम लगा दिया। ग्रामीण मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख और घायलों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग पर अड़ गए। मौके पर अधिकारियों के नहीं पहुंचने से नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि आधे घंटे के भीतर अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे तो वे एनएच-58 पर भी जाम लगा देंगे। मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख और घायलों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग, आधे घंटे में अधिकारी नहीं पहुंचे तो एनएच-58 जाम करने की चेतावनी ग्रामीण बोले कि परिवार को मिले सहायता राशि अचानक लगाए गए जाम से कांवड़ पटरी मार्ग पर वाहनों के पहिये थम गए। मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना था कि हादसे ने चार परिवारों को उजाड़ दिया है। किसी परिवार ने अपना बेटा खोया है तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। इसके बावजूद पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता नहीं मिली है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मुआवजे की घोषणा कर पीड़ित परिवारों को राहत दिलाने की मांग की। माता की ज्योत लेने गए थे, घर पहुंचीं चार अर्थियां कुशावली गांव निवासी अमन पुत्र चंदन, पंकज पुत्र ओमप्रकाश, बिल्लू उर्फ रमेश पुत्र सूरज बली और सागर सोम पुत्र राजेंद्र सात अक्टूबर को मां शाकुंभरी देवी की ज्योत लेने गए थे। शुक्रवार रात ट्रैक्टर-ट्रॉली से लौटते समय देवबंद क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में चारों की मौत हो गई। हादसे में गांव के कई अन्य लोग भी घायल हुए थे। शनिवार को चारों मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया तो गांव में मातम छा गया। एक साथ चार चिताएं जलने से हर आंख नम हो गई। इनकी हुई है हादसे में मौत मृतकों में करीब 45 वर्षीय पंकज मजदूरी कर परिवार पालते थे। 26 वर्षीय अमन कैपरी फाइनेंस कंपनी में नौकरी करता था। 24 वर्षीय सागर सहारनपुर की एक कंपनी में कार्यरत था, जबकि करीब 55 वर्षीय बिल्लू उर्फ रमेश खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। चार मौतों से सदमे में डूबे गांव में अब मुआवजे की मांग को लेकर आक्रोश बढ़ गया है।

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