महाकुंभ में बनी थीं महामंडलेश्वर, अब ग्लैमर अवतार में ममता-कुलकर्णी:जयपुर फिल्म फेस्टिवल में पुराने गानों पर नाचते नजर आई, वेस्टर्न लुक वायरल
प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान आध्यात्म की राह पर जाने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। महाकुंभ में उन्होंने किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर की पदवी ग्रहण की थी। संगम तट पर उन्होंने पिंडदान भी किया था। इसके बाद उनका नाम ममता नंदगिरी रखा गया था। अब जयपुर में आयोजित 14वें राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में ममता कुलकर्णी पुराने अंदाज में नजर आईं। इस दौरान उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। पहले 3 तस्वीरें देखिए…. पुराने गानों पर डांस करती नजर आईं फिल्म फेस्टिवल के दौरान ममता कुलकर्णी ने अपने पुराने गानों पर डांस किया और गाना भी गाया। वह वेस्टर्न ड्रेस में नजर आईं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोग उनके बदले अंदाज को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स ने उनके साध्वी रूप और अब के ग्लैमरस अंदाज को लेकर सवाल किए हैं। एक यूजर ने लिखा, "भगवा चोला कहां गया?" वहीं एक अन्य ने लिखा, "यह तो साध्वी बन गई थीं।" महाकुंभ में बनी थीं महामंडलेश्वर महाकुंभ के दौरान ममता कुलकर्णी किन्नर अखाड़े पहुंची थीं। यहां उन्होंने महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया था। दोनों के बीच करीब एक घंटे तक महामंडलेश्वर बनाए जाने को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद किन्नर अखाड़े की ओर से उन्हें महामंडलेश्वर बनाने का ऐलान किया गया था। उन्होंने संगम तट पर पिंडदान भी किया था और आध्यात्मिक जीवन अपनाने की बात कही थी। विवादों में रही ममता, मैगजीन के लिए टॉपलेस फोटोशूट कराया शाहरुख खान, सलमान खान, अजय देवगन, अनिल कपूर जैसे बड़े स्टार्स से साथ स्क्रीन शेयर करने वाली ममता, उस वक्त विवादों में आई जब उन्होंने साल 1993 में स्टारडस्ट मैगजीन के लिए टॉपलेस फोटोशूट कराया था। वहीं, डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने ममता को फिल्म 'चाइना गेट' में बतौर लीड एक्ट्रेस लिया था। शुरुआती अनबन के बाद संतोषी, ममता को फिल्म से बाहर निकालना चाहते थे। खबरों के मुताबिक, अंडरवर्ल्ड से प्रेशर बढ़ने के बाद, उन्हें फिल्म में रखा गया। हालांकि, फिल्म फ्लॉप साबित हुई और बाद में ममता ने संतोषी पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप भी लगाया। ममता कुलकर्णी का जन्म मुंबई के मिडिल क्लास फैमिली में हुआ था। ड्रग माफिया से रचाई शादी, साध्वी बनीं ममता पर आरोप लगा कि उन्होंने दुबई के रहने वाले अंडरवर्ल्ड ड्रग माफिया विक्की गोस्वामी से शादी की थी। हालांकि, ममता ने अपनी शादी की खबरों को हमेशा ही अफवाह बताया। ममता का कहना था, 'मैंने कभी किसी से शादी नहीं की थी। यह सही है कि मैं विक्की से प्यार करती हूं, लेकिन उसे भी पता होगा कि अब मेरा पहला प्यार ईश्वर हैं।' ममता ने 2013 में अपनी किताब 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगिनी' रिलीज की थी। इस दौरान फिल्मी दुनिया को अलविदा कहने की वजह बताते हुए कहा था, 'कुछ लोग दुनिया के कामों के लिए पैदा होते है, जबकि कुछ ईश्वर के लिए पैदा होते हैं। मैं भी ईश्वर के लिए पैदा हुई हूं।' फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने के बाद ममता विक्की गोस्वामी के साथ दुबई और केन्या में जाकर रहने लगी थीं। तमिल फिल्म से शुरू किया करियर ममता कुलकर्णी का जन्म 20 अप्रैल 1972 को मुंबई में हुआ था। ममता ने 1991 में अपने करियर की शुरुआत तमिल फिल्म 'ननबरगल' से की। साल 1991 में ही उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘मेरा दिल तेरे लिए’ रिलीज हुई। वेबसाइट आईएमडीबी के मुताबिक एक्ट्रेस ने अपने करियर में कुल 34 फिल्में की हैं। ममता को साल 1993 में फिल्म ‘आशिक आवारा’ के लिए बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। इसके बाद वे 'वक्त हमारा है', 'क्रांतिवीर', 'करण अर्जुन', 'बाजी' जैसी फिल्मों में नजर आईं। उनकी लास्ट फिल्म 'कभी तुम कभी हम' साल 2002 में रिलीज हुई थी। फिल्म करण अर्जुन के सेट पर शाहरुख खान, राकेश रोशन और सलमान खान के साथ ममता कुलकर्णी। महामंडलेश्वर बनने की यह है प्रक्रिया पहले अखाड़े को आवेदन करना होता है। संन्यास की दीक्षा देकर संत बनाते हैं। नदी किनारे मुंडन फिर स्नान कराते हैं। परिवार और खुद का तर्पण कराते हैं। पत्नी, बच्चों समेत परिवार का पिंड दान कर संन्यास परंपरा अनुसार विजय हवन संस्कार होता है। दीक्षा दी जाती है। गुरु बनाकर चोटी काटते हैं। अखाड़े में दूध, घी, शहद, दही, शक्कर से बने पंचामृत से पट्टाभिषेक होता है। अखाड़े की ओर से चादर भेंट की जाती है। 2013 में ममता कुलकर्णी ने सोशल मीडिया पर ये शेयर की थी। जिस अखाड़े का महामंडलेश्वर बना है, उसमें प्रवेश होता है। साधु-संत, आम लोग और अखाड़े के पदाधिकारियों को भोजन करवाकर दक्षिणा दी जाती है। घर से संबंध खत्म करने होते हैं। संन्यास काल के दौरान जमा धन जनहित के लिए देना होगा। खुद का आश्रम, संस्कृत विद्यालय, ब्राह्मणों को नि:शुल्क वेद की शिक्षा देना होती है।
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