चूरू के ‘गेस पेपर’ से कैसे रद्द हुई नीट यूजी 2026 परीक्षा, पूरे घोटाले की विस्तार से कहानी
नीट यूजी 2026 परीक्षा को रद्द किए जाने के बाद देशभर में बड़ा हड़कंप मच गया है। यह मामला राजस्थान के चूरू से शुरू हुए एक कथित ‘गेस पेपर’ से जुड़ा है, जिसमें 410 सवाल शामिल थे और जिनमें से कई सवाल परीक्षा में भी आए पाए गए। जांच में सामने आया कि यह पेपर कोचिंग नेटवर्क और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए तेजी से फैला। इससे परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 22.79 लाख छात्रों की इस परीक्षा पर असर पड़ा है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क और लीक के स्रोत की गहराई से जांच कर रही हैं।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 12 मई 2026
नीट यूजी 2026 रद्द होने से देशभर में मचा बड़ा हड़कंप
नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस परीक्षा में लगभग 22.79 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था, जो इसे देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा बनाता है।परीक्षा पूरी तरह पेन और पेपर मोड में कड़ी सुरक्षा के बीच कराई गई थी, फिर भी पेपर लीक का मामला सामने आया।सरकारी एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आई कि परीक्षा से पहले ही कुछ सवाल बाहर पहुंच चुके थे।इस घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी निराशा और गुस्सा देखने को मिल रहा है।
चूरू से शुरू हुआ ‘गेस पेपर’ कैसे बना विवाद की जड़
इस पूरे मामले की शुरुआत राजस्थान के चूरू जिले से मानी जा रही है।यहां एक हाथ से लिखा हुआ दस्तावेज मिला जिसे जांच एजेंसियों ने ‘गेस पेपर’ बताया।इस दस्तावेज में लगभग 410 प्रश्न शामिल थे, जो मेडिकल परीक्षा के पैटर्न से मिलते-जुलते थे।जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा में पूछे गए कई सवाल इसी गेस पेपर से मेल खाते थे।यही कारण है कि इसे पेपर लीक की मुख्य वजह माना जा रहा है।
जांच में सामने आई 120 सवालों की समानता
राजस्थान पुलिस की विशेष जांच टीम के अनुसार, इस गेस पेपर के लगभग 120 सवाल सीधे परीक्षा में आए।यह समानता बायोलॉजी और केमिस्ट्री जैसे मुख्य विषयों में सबसे ज्यादा देखी गईविशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मिलते-जुलते सवाल गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करते हैं।इसके कारण परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने की सिफारिश की गई थी।
केरल से शुरू होकर राजस्थान तक पहुंचा नेटवर्क
जांच में सामने आया कि इस पूरे मामले की शुरुआत एक मेडिकल छात्र से हुई थी, जो केरल में पढ़ाई कर रहा था।आरोप है कि उसने यह गेस पेपर तैयार कर 1 मई को राजस्थान के सीकर में अपने संपर्कों को भेजा।इसके बाद यह दस्तावेज धीरे-धीरे कई लोगों तक पहुंचा और एक बड़ा नेटवर्क बन गया।सीकर और आसपास के कोचिंग सेंटरों के जरिए यह पेपर छात्रों तक पहुंचने लगा।व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से यह तेजी से अलग-अलग राज्यों में फैल गया।
परीक्षा से पहले ही फैल चुका था पेपर
जांच एजेंसियों के अनुसार यह गेस पेपर परीक्षा से लगभग 42 घंटे पहले ही बड़े स्तर पर फैल गया थाकुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि शुरुआत में इसकी कीमत लाखों रुपये तक रखी गई थी।लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा करीब आई, इसकी कीमत घटकर कुछ हजार रुपये तक पहुंच गई।इससे यह स्पष्ट होता है कि इसके पीछे संगठित तरीके से काम करने वाला नेटवर्क था।यह नेटवर्क छात्रों को प्रभावित कर परीक्षा की गोपनीयता तोड़ रहा था।
कई राज्यों में गिरफ्तारी और जांच का दायरा बढ़ा
इस मामले में राजस्थान, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।जांच एजेंसियां लगातार डिजिटल चैट, कॉल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।कई कोचिंग संस्थानों और छात्रों की भूमिका भी संदिग्ध पाई जा रही है।सरकारी एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पेपर कितने छात्रों तक पहुंचा था।इस पूरे मामले को देश के सबसे बड़े शिक्षा घोटालों में से एक माना जा रहा है।
नीट परीक्षा पर गंभीर असर और छात्रों की चिंता
नीट परीक्षा देश में मेडिकल कोर्स में दाखिले का सबसे बड़ा माध्यम हैहर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के सपने के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं।इस बार परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में चला गया है।अभिभावक और छात्र सरकार से जल्द समाधान और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे मामले ने देश की परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि पेपर कितनी दूर तक लीक हुआ सरकार पर भी दबाव है कि वह भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए।छात्रों का भविष्य इस जांच और उसके परिणामों पर काफी हद तक निर्भर करता है।यह मामला केवल परीक्षा रद्द होने का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का सवाल बन गया है।