सोना-चांदी पर सरकार का बड़ा फैसला: आयात शुल्क बढ़ते ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दाम, आम जनता पर बढ़ा बोझ
केंद्र सरकार द्वारा सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद देशभर में सोना-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली। सोना 9231 रुपये और चांदी 16675 रुपये तक महंगी हो गई। सरकार का यह कदम बढ़ते व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा पर दबाव को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 13 मई 2026 ।
केंद्र सरकार द्वारा सोना और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी किए जाने के बाद देशभर के सर्राफा बाजारों में कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला है। सरकार ने पहले जहां इन कीमती धातुओं पर लगभग 6 प्रतिशत प्रभावी शुल्क रखा था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले के तुरंत बाद वायदा बाजार से लेकर खुदरा बाजार तक सोना और चांदी की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश के बढ़ते व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एक दिन में 9231 रुपये महंगा हुआ सोना
सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर सोने की कीमतों पर दिखाई दिया। देश के प्रमुख वायदा बाजार में सोने की कीमत अचानक उछलकर 1 लाख 62 हजार 648 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। यह अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में गिना जा रहा है। खुदरा बाजारों में भी सोने के दामों में भारी तेजी दर्ज की गई, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए आभूषण खरीदना और अधिक महंगा हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती रुचि भी सोने को मजबूती दे रही हैं। ऐसे समय में आयात शुल्क बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। शादी-विवाह के मौसम में इस बढ़ोतरी से ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
चांदी ने भी तोड़े सारे रिकॉर्ड, 16675 रुपये की छलांग
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद चांदी के दामों में करीब 16675 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वायदा बाजार में चांदी का भाव लगभग 2 लाख 99 हजार 283 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कई बड़े शहरों में खुदरा कीमतें 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार चली गईं। व्यापारियों का कहना है कि चांदी में यह तेजी केवल आयात शुल्क के कारण नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों में बढ़ती औद्योगिक मांग और निवेशकों की खरीदारी के चलते भी आई है। बाजार में भारी मांग और सीमित आपूर्ति के कारण चांदी में ऊपरी स्तर पर लगातार दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में चांदी और महंगी हो सकती है।
देश के प्रमुख शहरों में आज का सोना भाव
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 16 हजार 804 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गई, जबकि 22 कैरेट सोना 14 हजार 331 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर दर्ज किया गया। मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और केरल जैसे शहरों में भी सोने के दाम लगभग समान स्तर पर बने हुए हैं। अहमदाबाद और वडोदरा में भी कीमतों में भारी तेजी देखने को मिली है।विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने का असर केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों में भी सोना-चांदी महंगे होंगे। स्थानीय सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक ग्राहकों की खरीदारी फिलहाल धीमी पड़ सकती है, लेकिन निवेश के रूप में सोने की मांग बनी रहने की संभावना है। कई निवेशक इसे सुरक्षित निवेश मानकर लगातार खरीदारी कर रहे हैं।
सरकार ने अचानक क्यों बढ़ाया आयात शुल्क
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना और चांदी विदेशों से आयात करता है। इन आयातों का भुगतान विदेशी मुद्रा विशेषकर डॉलर में किया जाता है। पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण देश पर विदेशी मुद्रा का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने गैर-जरूरी आयातों को कम करने की रणनीति अपनाई है।
वित्तीय आंकड़ों के अनुसार कारोबारी वर्ष 2025-26 में भारत का कुल सोना आयात लगभग 24 प्रतिशत बढ़कर 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे देश का व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया। साथ ही चालू खाता घाटा भी सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 1.3 प्रतिशत तक पहुंच गया। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने इसी बढ़ते आर्थिक दबाव को कम करने के लिए आयात शुल्क में भारी वृद्धि का फैसला लिया है।
आम लोगों और बाजार पर क्या पड़ेगा असर
सोना और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी तेजी का सबसे अधिक असर आम ग्राहकों और ज्वेलरी कारोबार पर पड़ने वाला है। शादी-विवाह और त्योहारों के मौसम में लोगों को अब आभूषण खरीदने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक रकम खर्च करनी पड़ेगी। छोटे ज्वेलर्स और स्थानीय कारोबारियों को भी ग्राहकों की संख्या में गिरावट का डर सता रहा है।हालांकि निवेश के नजरिए से कई विशेषज्ञ अभी भी सोने और चांदी को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। उनका कहना है कि वैश्विक अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशक कीमती धातुओं की ओर आकर्षित होते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तनाव बना रहता है तो आने वाले महीनों में सोना और चांदी दोनों नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।
विदेशी बाजार और वैश्विक तनाव भी बड़ी वजह
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध जैसे हालात, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती ने भी सोना-चांदी की कीमतों को ऊपर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। वैश्विक निवेशक आर्थिक अस्थिरता के समय सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी खरीदते हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का अधिकांश कीमती धातु विदेशों से मंगाते हैं, वहां वैश्विक कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजारों पर दिखाई देता है। अब आयात शुल्क बढ़ने के बाद घरेलू बाजार में कीमतें और अधिक बढ़ गई हैं। बाजार जानकारों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में वैश्विक हालात नहीं सुधरे तो कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।