नोएडा में AI बताएगा कहां,कब और क्यों लगता है जाम:गूगल मैप से जुड़ेगा सिस्टम, कैमरे और आप्टिकल लाइन की नहीं जरुरत, 1-2 महीने का डेटा रहेगा सुरक्षित

Oct 02, 2026 - 16:40
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नोएडा में AI बताएगा कहां,कब और क्यों लगता है जाम:गूगल मैप से जुड़ेगा सिस्टम, कैमरे और आप्टिकल लाइन की नहीं जरुरत, 1-2 महीने का डेटा रहेगा सुरक्षित
शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या को समझने और उसके स्थायी समाधान के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए एआई सॉफ्टवेयर को गूगल मैप के साथ जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी क्षेत्र की करेंट लोकेशन या फीड किए गए इलाके में ट्रैफिक की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। खास बात यह होगी कि सिस्टम सिर्फ उस समय का जाम नहीं बताएगा, बल्कि एक से दो महीने तक रोजाना का ट्रैफिक डेटा सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी सड़क या स्थान पर किस समय नियमित रूप से जाम लगता है। पता चलेगा जाम का असली कारण एआई सिस्टम के पुराने डेटा का विश्लेषण कर यह देखा जा सकेगा कि किसी स्थान पर रोज कितनी गाड़ियां गुजरती हैं। जाम किस समय और कितनी देर रहता है। इसके साथ ही जाम की संभावित वजहों का भी विश्लेषण किया जा सकेगा। इस डेटा के आधार पर यह तय करने में मदद मिलेगी कि संबंधित सड़क पर क्या बदलाव किए जाएं। जैसे ट्रैफिक डायवर्जन, सड़क की क्षमता बढ़ाना, सिग्नल व्यवस्था में बदलाव या अन्य ट्रैफिक मैनेजमेंट उपाय। कैमरे और फाइबर की नई लाइन की जरूरत नहीं इस तकनीक की खासियत यह है कि इसके लिए जाम का डेटा जुटाने के लिए हर जगह नए कैमरे या फाइबर ऑप्टिकल लाइन बिछाने की जरूरत नहीं होगी। सिस्टम में पहले से लगे कैमरों को एक्सेस कर उनकी फीड से भी ट्रैफिक की जानकारी जुटाई जा सकेगी। यहां कैमरों की जरुरत ही नहीं होगी वो गूगल सेटलाइट से ही डेटा मिल सकेगा। अभी की व्यवस्था में पुराना डेटा नहीं नोएडा में अभी इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के जरिए ट्रैफिक की निगरानी की जा रही है। इसमें जीपीएस और गूगल मैप के जरिए रियल टाइम ट्रैफिक और जाम की जानकारी मिलती है। मौजूदा आईटीएमएस में तत्काल ट्रैफिक स्थिति की जानकारी मिल जाती है, लेकिन लंबे समय का ट्रैफिक डेटा उपलब्ध नहीं होता। कैमरों की फीड को स्टोर किया जा सकता है। दोनों सिस्टम को एक साथ चलाएंगे अब प्रस्तावित एआई सिस्टम को आईटीएमएस के साथ जोड़कर चलाने की तैयारी है। इससे रियल टाइम ट्रैफिक के साथ पुराने डेटा का विश्लेषण भी किया जा सकेगा। इस प्रस्ताव का प्रेजेंटेशन नोएडा प्राधिकरण में किया जा चुका है। अधिकारियों के स्तर पर योजना पर विचार किया जा रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो इसके लिए आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी की जाएगी।

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