नरेंद्र मोहन जयंती पर 'अंतस् अग्नि' कार्यक्रम:वक्ता बोले- 'तनावग्रस्त जेन-जी के लिए शांति का अमृत हैं उनकी कविताएं'
अनन्त रंगों से सजा-खिलखिलाता जीवन अहंकार का दास क्यों बने... प्रख्यात कवि, पत्रकार और पूर्व सांसद स्व. नरेंद्र मोहन की इन पंक्तियों में ही मानसिक स्वास्थ्य और जीवन का वास्तविक मूल मंत्र छिपा है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस और स्व. नरेंद्र मोहन की जयंती के विशेष अवसर पर पांच दिवसीय 'अंतस् अग्नि' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि नरेंद्र मोहन की कविताएं आज की तनावग्रस्त 'जेन-जी' (Gen-Z) पीढ़ी के लिए सकारात्मकता का अमृत हैं। कार्यक्रम में स्व. नरेंद्र मोहन के साथ लंबे समय तक कार्य कर चुके शिक्षाविद डॉ. रमेश वर्मा ने अपने पुराने संस्मरण साझा किए। डॉ. रमेश वर्मा ने जोर देते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को उनके विराट व्यक्तित्व और विचारों से जोड़ने की महती आवश्यकता है। इसके लिए उनके चर्चित कॉलम 'विचार प्रवाह' और काव्य संग्रहों को स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल कर पढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने कानपुर शहर में स्व. नरेंद्र मोहन की एक आदमकद मूर्ति और भव्य स्मारक स्थापित करने की भी प्रमुखता से मांग उठाई। डॉक्यूमेंट्री से जीवन पर डाला प्रकाश समारोह के दौरान जिम्सी (JIMMC) के निदेशक डॉ. उपेंद्र अयोध्या ने स्व. नरेंद्र मोहन के जीवन पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया। वहीं, वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. आराधना गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए तनाव और अवसाद के शारीरिक लक्षणों, जैसे- सिर, गर्दन और कंधों में होने वाले दर्द के वैज्ञानिक कारणों को विस्तार से समझाया। कविताओं में है सकारात्मक ऊर्जा की अग्नि कार्यक्रम के अंतिम चरण में हिमांशु और शिवांसु ने अपनी मनमोहक काव्य प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोहन और उनके भाई योगेंद्र मोहन की कविताएं अंतर्मन में सकारात्मक ऊर्जा जलाए रखने वाली पवित्र अग्नि के समान हैं। इस अवसर पर फाउंडेशन के सीईओ डॉ. जे.एन. गुप्ता, प्रखर श्रीवास्तव, डॉ. दिव्या चौधरी, डॉ. अनिल सिंह और अमरदीप सिंह सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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