पैरालिसिस के बाद स्वाति ने सिल्वर जीता:पति ने हाथ पकड़कर रास्ता दिखाया तो ब्लाइंड सिमरन ने जीता गोल्ड; पैरा एशियन गेम्स में यूपी के 10 खिलाड़ी
जापान के आइची-नागोया में हुए पैरा एशियन गेम्स में भारत ने 114 मेडल जीते। इनमें 13 मेडल यूपी के खिलाड़ियों ने हासिल किए। 5 गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 कांस्य जीते। ये सिर्फ मेडल नहीं हैं, बल्कि मुश्किल हालात में कामयाबी हासिल करने वाले 10 खिलाड़ियों के संघर्ष का नतीजा है। जिसे आंख से नहीं दिखता था, उसने सबसे तेज दौड़कर गोल्ड मेडल जीता। जिसका पैर पोलियो से खराब हो गया, वह व्हीलचेयर से देश के लिए 2 मेडल जीतकर लाया। एक्सीडेंट के बाद 6 साल तक बेड पर पड़े रहने वाले खिलाड़ी दो अलग-अलग खेलों में 2 मेडल ले आया। पढ़िए इन खिलाड़ियों के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी… गाजियाबाद के मोदीनगर में मनोज शर्मा के घर 6.5 महीने की प्री-मेच्योर डिलीवरी हुई। बच्ची को 6 महीने तक इनक्यूबेटर में रखा गया। ठीक होने पर नाम रखा गया- सिमरन। 2 साल की हुईं तो पता चला कि उन्हें दूर की चीजें दिखती ही नहीं। जांच में सामने आया कि वे सिर्फ 6 मीटर तक ही देख सकती हैं। परिवार और पड़ोसी सब दुखी थे, लेकिन पिता ने हार नहीं मानी। बेटी को पढ़ाया। मोदीनगर के रुकमणि मोदी महिला इंटर कॉलेज पहुंचीं, तो एथलेटिक्स पर फोकस किया। 2021 टोक्यो पैरालिंपिक में 100 मीटर टी-13 दौड़ में वे 11वें नंबर पर रहीं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 2023 जापान विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड, हांगझोउ एशियन गेम्स में 2 सिल्वर और पिछले साल वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीता। अब आइची-नागोया में सिमरन ने 100 और 200 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता। इस इवेंट में धावकों को गाइड के सहारे दौड़ना होता है। खास बात यह रही कि उनके गाइड उनके पति गजेंद्र सिंह रहे, जो खुद सेना में एथलीट हैं। 2017 में शादी के बाद गजेंद्र ने ही सिमरन को लगातार मोटिवेट किया था। साल- 2000 में मुजफ्फरनगर के हासमपुर गांव में अनिल पाल के घर बेटी प्रीति का जन्म हुआ। 6 दिन बाद ही बच्ची का पैर टेढ़ा होने लगा। पता चला कि सेरेब्रल पाल्सी बीमारी है। बैसाखी से चलना शुरू किया और पैर सीधा करने के लिए प्लास्टर तक चढ़वाया। बाद में पिता ने बेटी को दादा के पास मेरठ छोड़ दिया। प्रीति पैरालंपिक खिलाड़ियों को देखकर मोटिवेट हुईं। स्टेडियम में जाकर प्रैक्टिस करने लगीं। प्रीति टोक्यो पैरालंपिक 2020 में क्वॉलिफाई करने से चूक गईं। लेकिन, राष्ट्रीय पैरा खेलों व खेलो इंडिया गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। 2023 के एशियन गेम्स में चौथे नंबर पर रही। 2024 के पैरालंपिक में इतिहास रचते हुए कांस्य पदक जीता। अगले साल विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी कांस्य जीता। अब जापान में 100 और 200 मीटर में 2 सिल्वर मेडल जीते हैं। मेरठ के आयुष वर्मा का 2014 में एक्सीडेंट हो गया था। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लग गई, जिससे खड़े होना मुश्किल हो गया था। 6 साल तक बेड पर ही पड़े रहे। 2020 में व्हीलचेयर पर आए। तय किया कि अब यहीं से लक्ष्य हासिल करना है। आयुष ने शॉटपुट और भाला फेंक (जैवलिन) दोनों में प्रैक्टिस शुरू की। जापान पैरा एशियन गेम्स में उन्होंने कमाल कर दिया। पहले शॉटपुट F53 में 8.16 मीटर थ्रो करके गोल्ड जीता, फिर अगले ही दिन जैवलिन थ्रो में कांस्य पदक जीत लिया। आयुष भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी बने हैं, जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में इन दोनों इवेंट में उतरकर मेडल जीता। सुवर्णा राज का जन्म नागपुर में हुआ, लेकिन अब परिवार नोएडा में रहता है। 2 साल की उम्र में ही पोलियो से दोनों पैर खराब हो गए। चलना-फिरना मुश्किल हो गया और जिंदगी व्हीलचेयर पर आ गई। लेकिन हिम्मत बरकरार रखी। डिस्कस थ्रो में आगे बढ़ीं। दुबई के फज्जा इंटरनेशनल में ब्रॉन्ज और 2026 की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में गोल्ड व सिल्वर जीता। अब जापान एशियन गेम्स में सुवर्णा ने 15.66 मीटर का अपना बेस्ट थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता। उनकी इस जीत पर सीएम योगी ने भी ट्वीट कर बधाई दी। कहा- आप यूपी का गौरव हैं। उन्नाव की प्राची पांडेय स्पाइना बिफिडा जैसी न्यूरो बीमारी से जूझ रही हैं। अपने बल पर खड़ी नहीं हो सकतीं। चंडीगढ़ से M.Tech करके सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनीं, लेकिन मन खेलों में लगता था। शुरुआत में डॉक्टरों ने कहा कि खेलना छोड़ दो, वरना पैर कमजोर होकर लकवा मार जाएगा। प्राची ने एक न सुनी और साई गांधीनगर में प्रैक्टिस जारी रखी। पैरा टेबल टेनिस के अलग-अलग टूर्नामेंट में जाने लगीं। जर्मनी, ब्राजील, नाइजीरिया, जॉर्डन जैसे देशों में जाकर पदक जीता। अब नागोया पैरा एशियन गेम्स में महिला एकल क्लास-6 टेबल टेनिस में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। प्राची की 6 बार सर्जरी हो चुकी है। वह छड़ी के सहारे ही खड़ी होती हैं। यूपी कैडर के 2007 बैच के IAS सुहास एलवाई आजमगढ़, नोएडा और प्रयागराज के डीएम रह चुके हैं। इस वक्त खेल एवं युवा कल्याण विभाग में सचिव हैं। 2020 के पैरालंपिक में सिल्वर मेडल जीता था। 2024 के पैरालंपिक में भी सिल्वर मेडल हासिल किया था। अब एशियन गेम्स में उन्हें कांस्य पदक मिला है। सुहास न सिर्फ बेहतरीन खिलाड़ी हैं, बल्कि साथी खिलाड़ियों के बड़े मोटिवेटर भी हैं। सीएम योगी अक्सर उनके नाम की चर्चा करते हैं। वो मूल रूप से कर्नाटक के हैं। 2007 में IAS बने थे। गौतमबुद्धनगर के गोविंदगढ़ के रहने वाले प्रवीण कुमार का जन्म 2003 में हुआ। बाएं पैर में गड़बड़ी का पता चलने पर परिवार परेशान हो गया। बड़े होने पर लंगड़ा कर चलने लगे। प्रवीण ने इस कमजोरी को अपनी ताकत बनाया। 2020 टोक्यो पैरालंपिक पहुंचे और हाई जंप में सिल्वर मेडल जीतकर सबको चौंका दिया। 2024 के पेरिस पैरालंपिक में इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया। अब जापान के पैरा एशियन गेम्स में 2.5 मीटर की छलांग लगाकर फिर गोल्ड मेडल पर कब्जा किया है। प्रवीण पिछले जितने भी इवेंट में हिस्सा बने, ज्यादातर में पदक जीता है। स्वाति चौधरी की जिंदगी किसी अजूबे से कम नहीं। 2017 में जब उनकी सिजेरियन डिलिवरी हुई, तब उनके पैर में लकवा मार गया था। जांच हुई तो पता चला कि ट्रांसवर्स मायलइटिस की समस्या है। मतलब शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं करता। 4 साल तक स्वाति का इलाज चला। पति गौरव चौधरी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। पत्नी की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ दी। पत्नी को तीरंदाजी की तरफ आगे बढ़ाया। स्वाति के लिए जापान का पैरा एशियन गेम्स अब तक का सबसे बड़ा इवेंट था। यहां उन्होंने चमत्कार करते हुए W1 श्रेणी में सिल्वर मेडल जीता। इसके पहले एशियन पैरा गेम्स में भारत की तरफ से इस श्रेणी में किसी भारतीय तीरंदाज ने पदक नहीं जीता था। उनकी इस जीत में पति गौरव का योगदान अहम है। मथुरा के राम रतन सिंह 2017 में एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गए थे, जिसमें उन्हें गंभीर सर्वाइकल चोट आई थी। हादसे से पहले वे कुश्ती और क्रिकेट खेला करते थे, लेकिन चोट की वजह से सब छूट गया। इसके बावजूद राम रतन ने हिम्मत नहीं हारी और खुद को डिस्कस थ्रो के लिए तैयार किया। एशियन गेम्स की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने अपना पहला एशियन पदक देश के नाम कर दिया। गाजियाबाद के प्रदीप कुमार ने जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) में शानदार प्रदर्शन किया। 27.45 मीटर थ्रो किया और सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। प्रदीप का यह प्रदर्शन उनकी निरंतरता का सबूत है। इससे पहले 2022 के एशियन गेम्स में भी उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था।
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