फर्जी प्रमाणपत्र बनाने पर पिता-पुत्री समेत तीन पर केस:सिद्धार्थनगर में कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, युवक को फंसाने का भी आरोप
सिद्धार्थनगर में शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र तैयार कराने, उनका इस्तेमाल करने और एक युवक को फर्जी मुकदमे में फंसाने के आरोप में पुलिस ने पिता-पुत्री समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद हुई। शिकायतकर्ता संतोष पासवान ने जुलाई में न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। कोर्ट के आदेश के करीब 70 दिन बाद 1 अक्टूबर को पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। संतोष पासवान के अनुसार, गांव के ही संतराम ने अपनी बेटी ऊषा के दो अलग-अलग शैक्षिक प्रमाणपत्र तैयार कराए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि दोनों में ऊषा की जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज है। एक प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 1 अप्रैल 2007, जबकि दूसरे शैक्षिक रिकॉर्ड में 8 जून 2009 बताई गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इन दस्तावेजों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, ऊषा की मेडिकल रिपोर्ट में उसकी उम्र 19 वर्ष दर्ज होने की बात भी शिकायत में कही गई है। बेटे को फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश का आरोप संतोष पासवान का आरोप है कि अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दस्तावेजों के आधार पर उनके बेटे संदीप पासवान को फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर 23 जुलाई को न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। शिकायत में यह भी कहा गया कि थाने और पुलिस अधीक्षक को सूचना देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट के आदेश पर 1 अक्टूबर को दर्ज हुआ केस न्यायालय ने 29 सितंबर को शोहरतगढ़ थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया। इसके बाद 1 अक्टूबर को पुलिस ने संतोष पासवान की शिकायत पर संतराम, ऊषा और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रमाणपत्रों और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।
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