प्रभारी-मंत्री के सामने श्रमिक ने रखी जर्जर मकान की समस्या:10 साल से आवास की मदद का इंतजार, बोला -रसीद दी, फीस भी भरता रहा, लाभ नहीं मिला
सेवा संकल्प अभियान के तहत शनिवार को श्रम विभाग मेरठ में श्रमिक सम्मान स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने फीता काटकर किया। इस दौरान राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर, महापौर हरिकांत अहलूवालिया और मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल मौजूद रहीं। शिविर के दौरान महेंद्र कुमार ने मंत्री असीम अरुण के सामने आवास योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत रखी। महेंद्र ने बताया कि करीब 10 साल पहले उसने भवन निर्माण/आवास से जुड़ी योजना के तहत आवेदन किया था। उसका मकान जर्जर हालत में है और छत भी खराब हो चुकी है। उसके अनुसार आवेदन के समय उसे मकान की मरम्मत के लिए करीब 25 हजार रुपए की सहायता मिलने की बात कही गई थी, लेकिन आज तक उसे एक रुपया भी नहीं मिला। योजना में आवेदन किया, रसीद मिली; सालों तक फीस भी जमा की महेंद्र ने बताया कि जब उसने योजना के लिए आवेदन किया था, तब उसे इसकी रसीद भी दी गई थी। इसके बाद वह लगातार योजना की फीस जमा करता रहा। उसके अनुसार शुरुआत में करीब चार-पांच साल तक 50 रुपए फीस जमा की और बाद में 20-20 रुपए की फीस भी नियमित रूप से भरता रहा। उसका कहना है कि फीस जमा करने में उसने कभी देरी नहीं की, लेकिन इसके बावजूद उसे योजना का लाभ नहीं मिला। अधिकारियों ने कहा- अब योजना लागू नहीं, श्रमिक ने उठाया सवाल अधिकारियों का कहना है कि जिस योजना के तहत महेंद्र ने आवेदन किया था, वह अब लागू नहीं है। इस पर महेंद्र ने कहा कि जब योजना लागू थी, तब भी उसे कोई लाभ नहीं मिला। उसका कहना है कि अगर उस समय योजना लागू नहीं थी तो उसका आवेदन क्यों लिया गया और उसे रसीद क्यों दी गई। उसने बताया कि योजना के तहत उसे अब तक केवल साइकिल मिली थी, जो उसे अखिलेश यादव सरकार के समय मिली थी। मंत्री असीम अरुण ने शिकायत पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। वहीं, सीडीओ नूपुर गोयल ने कहा कि एक बार इस प्रकरण को देख लिया जाएगा। महेंद्र ने जर्जर मकान की स्थिति बताते हुए मामले की जांच कराने और पात्रता के अनुसार सहायता दिलाने की मांग की।
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