प्रयागराज की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को UGC ने थमाया नोटिस:नियमों की अनदेखी का आरोप, 20 छात्रों के भविष्य पर सवाल
प्रयागराज की डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (RPNLU) में संचालित एक वर्षीय एलएलएम (लोक विधि) कोर्स को लेकर नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय ने यूजीसी के एक वर्षीय एलएलएम उपाधि कार्यक्रम दिशानिर्देश-2012 की अनिवार्य शर्तें पूरी किए बिना कोर्स शुरू कर दिया। सितंबर में प्रयागराज के अधिवक्ता अंकित मिश्रा ने मामले की शिकायत शासन और यूजीसी से की थी। शिकायत के बाद यूजीसी की ज्वाइंट सेक्रेटरी ने 6 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी की कुलपति और रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यूजीसी के नियमों और मानकों की अनदेखी यूजीसी के मानकों के अनुसार एक वर्षीय एलएलएम पाठ्यक्रम उन्हीं संस्थानों में संचालित किया जा सकता है, जहां सेंटर फॉर पोस्ट-ग्रेजुएट लीगल स्टडीज (CPGLS) स्थापित हो। शिकायत के मुताबिक RPNLU में ऐसा सेंटर नहीं है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में कम से कम 10 पूर्णकालिक शिक्षक होना जरूरी है। इनमें न्यूनतम 4 प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर शामिल होने चाहिए। शिकायत में दावा किया गया है कि विश्वविद्यालय इस मानक को भी पूरा नहीं करता। 10 छात्रों पर कम से कम 2 वरिष्ठ शिक्षक जरूरी नियमों के मुताबिक विद्यार्थियों और प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर का अनुपात 5:1 से अधिक नहीं होना चाहिए। यानी 10 विद्यार्थियों पर कम से कम दो वरिष्ठ संकाय सदस्य होने चाहिए। शिकायत में कहा गया है कि RPNLU में एक भी नियमित प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद पिछले सत्र में 10 और मौजूदा सत्र में भी 10 विद्यार्थियों को एलएलएम में प्रवेश दिया गया। इस तरह कुल 20 विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम में पढ़ रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने नहीं दिया जवाब मामले में यूनिवर्सिटी के पीआरओ प्रकाश त्रिपाठी से जवाब मांगा गया, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने यूजीसी की गाइडलाइन को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की। 20 विद्यार्थियों के भविष्य पर मंडराया संकट शिकायत में आशंका जताई गई है कि यदि आगे चलकर इन डिग्रियों की वैधता, मान्यता या समकक्षता पर सवाल उठते हैं तो विद्यार्थियों को परेशानी हो सकती है। इसका असर NET, PhD प्रवेश, उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले और न्यायिक सेवाओं की परीक्षाओं में पड़ने की आशंका जताई गई है। विद्यार्थियों ने इस पाठ्यक्रम में अपनी मेहनत, समय और पैसा लगाया है, इसलिए मामले में यूजीसी के जवाब के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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