प्रयागराज में साहबों के चौखट पर 'गौ-सेवा':कलेक्ट्रेट के चमचमाते गलियारे में आराम फरमाती गायें, किसी को कोई 'एतराज' नहीं!
यह दृश्य मंगलवार की दोपहर प्रयागराज कलेक्ट्रेट परिसर का है। इस परिसर में डीएम, एडीएम समेत जिले के सभी आला अफसर बैठते हैं। अंग्रेजों के जमाने की इस बिल्डिंग के गलियारे में हाल ही में टाइल्स लगवाई गई। बाहर भले ही कड़क धूप है लेकिन इस चमचमाते टाइल्स वाले गलियारे में गर्मी बिल्कुल नहीं तो यह जगह गायों के आरामगाह बन गई है। इस गलियारे के दाएं तरफ डीएम मनीष कुमार वर्मा की कोर्ट और एडीएम सिटी मंगलेश दुबे का दफ्तर है। बाएं तरफ एडीएम प्रशासन उपमा पांडेय और उनके बगल में सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह का दफ्तर है। थोड़ा आगे बढ़ेंगे तो एक तरफ अभिलेखागार है तो दूसरी तरफ मुख्य राजस्व अधिकारी और एडीएम नजूल संजय कुमार का दफ्तर है। इसी परिसर में आबकारी अधिकारी, असलहा व अन्य प्रशासनिक अफसरों के कार्यालय हैं। इस परिसर में अफसरों, अधिवक्ताओं और आम लोगों की चहल पहल के बीच गायों का इस तरह ब्रेफिक्र आराम करना किसी को असहज नहीं करता है। सब लोग उससे बचकर निकल रहे हैं। अफसर, बाबू, चपरासी, वकील, फरियादी में से किसी ने इनको उठाने की जहमत नहीं उठाई। सब कुछ सामान्य चल रहा है। यह दृश्य प्रयागराज के प्रशासनिक प्रभाव और उनकी कार्यप्रणाली को बखूबी प्रदर्शित कर रहा है। वैसे इस तरह दोपहर को कलेक्ट्रेट के गलियारे में गायों का आराम करना, कोई नया नहीं है। ऐसे हालात रोजाना रहते हैं। गाय जहां आराम करेंगी, स्वाभाविक है गोबर भी करेंगी... सो यहां पर किया भी है। गलियारे में गोबर फैलने से जिस अफसर या बाबू को दिक्कत हुई, वह बचकर निकल गया लेकिन उसे हटवाने के लिए किसी से नहीं कहा। इतना जरूरत है कि इस दृश्य को कैमरे में कैद करते हुए कुछ अधिवक्ताओं ने देखा तो बोले, वाह गुरु सही पकड़े हैं। खैर इसका वीडियो बना तो बाबुओं में खलबली मची। इस परिसर में सफाई की जिम्मेदारी नाजिर व प्रशासनिक अधिकारी अजय शंकर श्रीवास्तव की है। इनका दफ्तर इस बिल्डिंग से थोड़ी दूरी है। जानकारी मिली तो वह तत्काल सक्रिय हुए और चपरासी को डंडा लेकर दौड़ा दिया। उसने गायों को भगाया और सफाई करवाई।
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