तीन CM, 3 वादे और 5 डेडलाइन! पंजाब से ₹95 हजार करोड़ का ड्रग्स कारोबार खत्म क्यों नहीं होता

पंजाब में नशे का कारोबार लंबे समय से गंभीर समस्या बना हुआ है। कई सरकारों ने इसे खत्म करने के लिए अलग-अलग समयसीमाएं तय कीं, लेकिन तस्करी, सीमा पार से आपूर्ति, ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की पहुंच, स्थानीय नेटवर्क और नशे की बढ़ती मांग के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। 30 सितंबर 2026 को अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने का वादा किया। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और नशीले पदार्थों की जब्ती के बावजूद अब भी सवाल यही है कि क्या केवल पुलिस कार्रवाई से इस पूरे तंत्र को समाप्त किया जा सकता है।

Oct 01, 2026 - 13:47
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तीन CM, 3 वादे और 5 डेडलाइन! पंजाब से ₹95 हजार करोड़ का ड्रग्स कारोबार खत्म क्यों नहीं होता

दि राइजिंग न्यूज़ | पंजाब | 1 अक्टूबर 2026

पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। अलग-अलग सरकारों ने नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए समयसीमा तय की, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। सीमा पार से तस्करी, ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की आपूर्ति, स्थानीय स्तर पर नेटवर्क, बेरोजगारी और नशे के आदी लोगों के पुनर्वास जैसी कई चुनौतियां इस समस्या को जटिल बनाती हैं। 30 सितंबर 2026 को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा की सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने का वादा किया।


पंजाब में नशे का संकट कितना बड़ा है

पंजाब में नशीले पदार्थों का इस्तेमाल और उनकी तस्करी लंबे समय से गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है। राज्य की भौगोलिक स्थिति भी इस समस्या को जटिल बनाती है, क्योंकि पाकिस्तान से लगी सीमा के रास्ते तस्करी की कोशिशें लगातार सामने आती रही हैं। इसके अलावा युवाओं में नशे की लत, रोजगार की कमी और नशे के कारोबार से जुड़े स्थानीय नेटवर्क समस्या को और गहरा करते हैं।राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो की वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल 3,567 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी। इसमें पंजाब से 2,086 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई, जो राष्ट्रीय स्तर पर हुई कुल जब्ती का करीब 58 प्रतिशत है। रिपोर्ट में पंजाब सहित भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन के जरिए तस्करी के बढ़ते इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण चुनौती बताया गया है।


95 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का दावा कितना बड़ा है

पंजाब में नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े धन के प्रवाह को लेकर पूर्व प्रवर्तन निदेशालय अधिकारी निरंजन सिंह ने करीब 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का दावा किया है। यह आंकड़ा उनके अनुसार विभिन्न अध्ययनों पर आधारित है और इसमें केवल नशीले पदार्थ बेचने वाले लोग ही शामिल नहीं हैं।इस तरह के नेटवर्क में तस्करों के अलावा धन उपलब्ध कराने वाले, संरक्षण देने वाले और अलग-अलग स्तर पर सहयोग करने वाले लोगों की भूमिका की बात सामने आती रही है। यही वजह है कि केवल गिरफ्तारियां करने से समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल माना जाता है। नशे के पूरे तंत्र में आपूर्ति, धन, स्थानीय संपर्क और मांग—इन सभी कड़ियों पर एक साथ कार्रवाई की आवश्यकता होती है।


तीन सरकारें और नशा खत्म करने के बड़े वादे

पंजाब में नशे के खिलाफ सबसे चर्चित राजनीतिक वादों में तत्कालीन मुख्यमंत्री पद के दावेदार कैप्टन अमरिंदर सिंह का 2015 का वादा शामिल रहा। बठिंडा की एक रैली में उन्होंने चार सप्ताह के भीतर नशे की कमर तोड़ने की बात कही थी। वर्ष 2017 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भी पंजाब में नशे की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।बाद में अमरिंदर सिंह ने अपने पुराने बयान की व्याख्या करते हुए कहा था कि नशे की कमर तोड़ने का अर्थ नशे को पूरी तरह समाप्त करना नहीं था। यह उदाहरण बताता है कि पंजाब में नशे को खत्म करने के राजनीतिक वादे कितने लंबे समय से चुनावी और शासन संबंधी बहस का हिस्सा रहे हैं।

भगवंत मान सरकार की कई समयसीमाएं

वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी पंजाब से नशे को खत्म करने का लक्ष्य रखा। सरकार बनने के बाद शुरुआती समयसीमा अप्रैल 2022 तक की थी, लेकिन इसके बाद भी नशे की समस्या बनी रही। बाद में सरकार की ओर से अलग-अलग अभियानों और समयसीमाओं के जरिए नशामुक्त पंजाब का लक्ष्य दोहराया गया।वर्ष 2023 में एक साल के भीतर पंजाब को नशामुक्त करने की बात कही गई। इसके बाद वर्ष 2024 और 2025 में भी नशे के खिलाफ अभियान और पुलिस कार्रवाई तेज करने के लक्ष्य रखे गए। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और जब्ती होने के बावजूद नशीले पदार्थों की आपूर्ति तथा सेवन को पूरी तरह रोकना चुनौती बना हुआ है।

अमित शाह की 31 दिसंबर 2029 की समयसीमा

30 सितंबर 2026 को जालंधर में भाजपा की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' के समापन कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यदि पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है तो 31 दिसंबर 2029 तक राज्य को नशामुक्त किया जाएगा। उन्होंने नशे के मुद्दे को आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की प्रमुख राजनीतिक प्राथमिकता के रूप में भी रखा। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। इसलिए 2029 की समयसीमा अब पंजाब की नशा विरोधी नीति और राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।


सीमा पार से तस्करी और ड्रोन बनी बड़ी चुनौती

पंजाब की पाकिस्तान से लगी सीमा नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती है। सुरक्षा जांच कड़ी होने के बाद तस्करी के तरीकों में बदलाव देखने को मिला है और ड्रोन के माध्यम से सीमा पार से नशीले पदार्थ भेजने की घटनाएं बढ़ी हैं।राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो की वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन आधारित तस्करी में बढ़ोतरी हुई है। पंजाब में वर्ष 2025 के दौरान जब्त हुई 2,086 किलोग्राम हेरोइन इस समस्या के पैमाने को दर्शाती है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब केवल सीमा पर घुसपैठ रोकने की चुनौती नहीं, बल्कि छोटे ड्रोन और उनके जरिए भेजे जा रहे सामान का पता लगाने की भी चुनौती है।


केवल तस्करों की गिरफ्तारी से समस्या क्यों नहीं खत्म होती

नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई में गिरफ्तारियां और जब्ती महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इससे समस्या की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। यदि किसी तस्कर को गिरफ्तार किया जाता है और उसके स्थान पर दूसरा व्यक्ति आपूर्ति शुरू कर देता है, तो केवल गिरफ्तारी आधारित कार्रवाई से पूरे नेटवर्क को समाप्त करना मुश्किल हो जाता है।इसके साथ ही नशे की मांग कम करना भी उतना ही जरूरी है। उपचार, पुनर्वास, परिवारों की सहायता, रोजगार और युवाओं के लिए बेहतर अवसर जैसी सामाजिक व्यवस्थाएं नशे की मांग को कम करने में भूमिका निभा सकती हैं। इसलिए नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल पुलिस कार्रवाई के बजाय कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक पुनर्वास से जोड़कर देखना जरूरी है।


बढ़ती जब्ती का मतलब क्या नशे की खपत भी बढ़ रही है

नशीले पदार्थों की जब्ती बढ़ना दो तरह से देखा जा सकता है। एक तरफ इसका अर्थ यह हो सकता है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई अधिक प्रभावी हुई है। दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी यह भी संकेत दे सकती है कि तस्करी का प्रयास और आपूर्ति का नेटवर्क अभी सक्रिय है।इसी कारण केवल जब्त किए गए नशीले पदार्थों की मात्रा के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पंजाब में नशे की खपत घट गई है। इसके लिए नशे की लत से उपचार पाने वालों की संख्या, ओवरडोज से होने वाली मौतें, नए मामलों और नशीले पदार्थों की उपलब्धता जैसे कई आंकड़ों को एक साथ देखना जरूरी है।


नशे के खिलाफ अभियान में उपचार भी महत्वपूर्ण

नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। जो लोग नशे की लत से जूझ रहे हैं, उनके लिए उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था भी आवश्यक है। ऐसे लोगों को अपराधी मानने के बजाय उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने से मांग को कम करने में मदद मिल सकती है।पंजाब में सरकारी नशामुक्ति केंद्रों में उपचार लेने वालों की संख्या बढ़ने का भी उल्लेख किया गया है। इसका एक अर्थ यह हो सकता है कि उपचार की जरूरत सामने आ रही है और अधिक लोग मदद के लिए संस्थानों तक पहुंच रहे हैं। लेकिन पुनर्वास के बाद व्यक्ति को दोबारा नशे की ओर जाने से रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


पंजाब में नशे का समाधान इतना मुश्किल क्यों है

पंजाब की नशे की समस्या केवल तस्करी का मामला नहीं है। इसमें सीमा पार से आने वाली आपूर्ति, स्थानीय तस्करी नेटवर्क, धन का प्रवाह, युवाओं में नशे की मांग, बेरोजगारी, सामाजिक परिस्थितियां और उपचार की व्यवस्था जैसे कई पहलू जुड़े हैं।यही वजह है कि अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में बड़े अभियान चलने और हजारों गिरफ्तारियां होने के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। स्थायी समाधान के लिए सीमा सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई के साथ नशे की मांग कम करने, उपचार बढ़ाने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और नशीले पदार्थों से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई करना भी जरूरी है।


2029 की नई समयसीमा के सामने सबसे बड़ा सवाल

अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने की समयसीमा रखी है। यह एक राजनीतिक घोषणा है, जिसका वास्तविक परिणाम भविष्य में लागू होने वाली नीतियों, कानून प्रवर्तन और पुनर्वास कार्यक्रमों पर निर्भर करेगा। अभी यह देखना बाकी है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह की विस्तृत कार्ययोजना सामने आती है। पंजाब में पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि नशे के खिलाफ केवल समयसीमा घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा। सीमा पार तस्करी रोकना, स्थानीय नेटवर्क को तोड़ना, अवैध धन पर कार्रवाई करना, नशे के आदी लोगों का उपचार और युवाओं के लिए रोजगार जैसे कई मोर्चों पर लगातार काम करना होगा। इसी से तय होगा कि आने वाले वर्षों में पंजाब में नशे की समस्या वास्तव में कितनी कम होती है।

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