रायबरेली में गंगा में गिर रहा गंदा नाला:जिला प्रशासन ने बनाई जांच समिति, 6 नालों की होगी जांच, 15 दिन में रिपोर्ट तलब
रायबरेली के डलमऊ कस्बे में गंगा नदी गंदे नालों के पानी से गंदी हो रही है। इसे रोकने के लिए प्रशासन ने कदम उठाए हैं। जिला गंगा समिति की बैठक के बाद जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने एक आदेश दिया है। इस आदेश के तहत, डलमऊ नगर पंचायत क्षेत्र में गंगा को गंदा कर रहे नालों पर लगे फिल्टर चैंबरों की जांच के लिए एक समिति बनी है। इसकी अध्यक्षता ईओ (नगर पंचायत डलमऊ) करेंगे। मो. आरिफ (एसबीएम शहरी) और वन दरोगा अंकित सिंह इसके सदस्य हैं। जांच में डलमऊ के छह प्रमुख नाले शामिल हैं, जिनसे गंदा पानी सीधे गंगा में मिलता है। इनमें पथवारी घाट नाला, दीनशाह गौरा घाट नाला, महाबीरन घाट नाला, बरूडडा घाट नाला, वीआईपी घाट नाला, बड़ा मठ नाला और श्मशान घाट नाला हैं। इन नालों की लंबाई, निकलने की जगह और भौगोलिक स्थिति की जानकारी इकट्ठा की जा रही है। इसका उद्देश्य गंगा में गिरने वाली गंदगी के हर रास्ते को बंद या रोकना है। फिल्टर चैम्बरों की होगी कड़ी तकनीकी जांच
गठित की गई विशेष जांच समिति को अगले पंद्रह दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच आख्या जिला गंगा समिति को भेजने का अल्टीमेटम दिया गया है। समिति को मौके पर जाकर सभी नालों पर बने फिल्ट्रेशन चैम्बरों की वर्तमान कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच करनी होगी। जांच के दौरान इन चैम्बरों के वास्तविक फोटो और जीपीएस लोकेशन जुटाने के साथ-साथ यह भी देखना होगा कि कहीं इनमें पानी का जमाव तो नहीं हो रहा है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को भी कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे इन सभी नालों में फिल्टर चैम्बर से निकलने वाले पानी का ट्रीटमेंट से पहले और ट्रीटमेंट के बाद का तकनीकी परीक्षण करें। इस पूरी कवायद से डलमऊ वासियों को उम्मीद जगी है कि अब गंगा के आंचल को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा।इस संबंध में अधिशासी अधिकारी सिकंदरादित्य से फोन पर वार्ता करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन नाट रिचबल बता रहा था।
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