रेलवे अस्पताल के गार्ड भुखमरी की कगार पर, धरना शुरू:SS4 ग्रुप ने 6 महीने से नहीं दी सैलरी, रिश्तेदारों से मांगकर चला रहे काम

Sep 28, 2026 - 19:03
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रेलवे अस्पताल के गार्ड भुखमरी की कगार पर, धरना शुरू:SS4 ग्रुप ने 6 महीने से नहीं दी सैलरी, रिश्तेदारों से मांगकर चला रहे काम
प्रयागराज सिविल लाइंस स्थित रेलवे हॉस्पिटल में तैनात 21 सुरक्षा कर्मियों ने छह महीने से वेतन नहीं मिलने के आरोप में सोमवार से अस्पताल के गेट पर धरना शुरू कर दिया। सुरक्षा कर्मियों का आरोप है कि SS4 ग्रुप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के ठेकेदार राकेश प्रताप सिंह की ओर से उन्हें लंबे समय से वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे कई कर्मचारियों के सामने घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे रिश्तेदारों से उधार लेकर परिवार का खर्च चला रहे हैं, जबकि बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं हो पा रही है। सुरक्षा कर्मियों के मुताबिक वे कोरोना काल से रेलवे अस्पताल में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले करीब छह वर्षों में कई एजेंसियां बदलीं, लेकिन पहले की एजेंसियों ने समय से वेतन के साथ पीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं दी थीं। कर्मचारियों का आरोप है कि SS4 ग्रुप के आने के बाद से भुगतान को लेकर लगातार समस्या बनी हुई है। सुरक्षा कर्मी सुलभ सिंह यादव ने बताया कि करीब छह महीने से वेतन नहीं मिला है। उनका कहना है कि कई बार ठेकेदार और रेलवे अस्पताल के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और लिखित आवेदन भी दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। आरोप है कि हर बार अगले महीने वेतन देने का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसी से परेशान होकर कर्मचारियों को धरने पर बैठना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार राकेश प्रताप सिंह कानपुर के रहने वाले हैं और SS4 ग्रुप से जुड़े हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक वे दबाव बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाते, तब तक उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता। सुरक्षा कर्मी जगदीश प्रसाद कुशवाहा ने आरोप लगाया कि छह साल की नौकरी में यह तीसरी सुरक्षा एजेंसी है, लेकिन वर्तमान SS4 ग्रुप की ओर से करीब छह महीने का वेतन बकाया है। उनका आरोप है कि पीएफ और ईएसआई का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार चलाने के लिए रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ रहा है और अब स्थिति भुखमरी जैसी हो गई है। कर्मियों के मुताबिक वर्तमान एजेंसी का टेंडर जनवरी तक है। उनका कहना है कि यदि अगले तीन महीने तक वे काम करते रहे और बकाया वेतन नहीं मिला तो उनका करीब नौ महीने का भुगतान फंस जाएगा। कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि एजेंसी का कार्यकाल खत्म होने के बाद उनके बकाया वेतन की जिम्मेदारी कौन लेगा। धरने पर बैठे सुरक्षा कर्मियों ने रेलवे प्रशासन, सरकार और जनप्रतिनिधियों से मामले में हस्तक्षेप कर बकाया वेतन दिलाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, वे धरना जारी रखेंगे।

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