रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला:भाई ने कहा ऐसा हो ही नहीं सकता वह आत्महत्या करें, साधु बनने से पहले जाना चाहते थे सेना में
संत प्रेमानंद महाराज के साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के मामले में भले ही आश्रम प्रबंधन ने चुप्पी साध रखी हो लेकिन परिवार सवाल खड़े कर रहा है। दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण के भाई का कहना है वह कभी आत्महत्या नहीं कर सकते। यह किसी सोची समझी साजिश का नतीजा है। मां ने कहा उनका बेटा सेना में जाना चाहता था लेकिन उसका अचानक मन बदला और भक्ति करने लगा। जिसके बाद वृंदावन पहुंच गए और संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेकर वहीं रहने लगे। 2 साल से नहीं देखा था बेटे का चेहरा साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद परिवार सदमे में हैं। घर पर आने वाले किसी शख्स को देखकर मां की आंखों से आंसू निकल पड़ते हैं। वह रोते रोते हर पल अपने बेटे को याद करती हैं। रसिक दुलारी शरण की मां लौंग देवी कहती हैं कि 2 साल पहले जब घर से वह निकले थे उसके बाद से शक्ल नहीं देखी। मां का दुख देखकर आप पड़ोस की महिलाएं उनको सांत्वना देते हुए संभालने की कोशिश कर रही हैं। परिजनों का आरोप दीक्षा के बाद नहीं दिया मिलने मां लौंग देवी ने बताया कि दीपक पढ़ाई में बहुत तेज था। परिवार की आर्थिक स्थिति देख उसे सर्विस करने की लगन लगी। इसके लिए आर्मी में प्रयास किया लेकिन दौड़ में फेल हो गया। इसके बाद उसका मन बदला और भक्ति करने लगा। घर पर पूजा पाठ करता था। इसके बाद दीपक ने नर्मदा की पैदल परिक्रमा की। परिक्रमा पूरी करने के बाद वह वृंदावन चला गया। एक बार घूमने गया और फिर दूसरी बार गया तो लौट कर नहीं आया। मां ने बताया जब उसने दीक्षा ली तब गए थे उसके बाद से शक्ल नहीं दिखी। मां ने कहा वह बेटे से मिलने गईं, आश्रम पहुंचीं कहा बेटे से मिलना है लेकिन आज आना कल आना कह कर घुमाते रहे। लेकिन मुलाकात नहीं हुई। मां ने कहा उनको विश्वास नहीं हो रहा कि उनका बेटा ऐसा कर सकता है। यह साजिश है इसकी जांच होनी चाहिए दीपक के भाई मनीष ने बताया कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि वह सुसाइड करे,यह कोई न कोई साजिश है इसकी जांच होनी चाहिए। मनीष ने बताया जितनी बार भाई से मिलने गए हमेशा यह कह दिया कि वह सेवा में हैं अभी नहीं मिल पाएंगे। दीपक के रिश्तेदार सोनू ने बताया कि या तो किसी ने उकसाया है या इसके पीछे कोई है। दीपक ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब ग्राइंडर चला तो उसकी आवाज हुई होगी इतनी बड़ी बिल्डिंग में किसी ने नहीं सुनी। जब दीपक छत पर गया तो पीछे एक व्यक्ति गया यह वीडियो में देखा है। इसके बाद वीडियो काट दिया गया। सोनू ने बताया कि सेवादारों का कहना था आश्रम में कोई नहीं था तो फिर वह व्यक्ति पीछे कैसे गया। सोनू कहते हैं धक्का किसी ने नहीं मारा वह खुद कूदे यह देखा लेकिन पीछे जाने वाला शख़्स कौन था,जब आश्रम में कोई नहीं था तो वह कैसे था। घटना के बाद भटकाते रहे आश्रम से जुड़े लोग सोनू ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर जब परिवार वहां पहुंचा तो आश्रम से जुड़े लोग इधर से उधर भटकाते रहे। फोन करते तो कहते आ रहे हैं रास्ते में हैं। सुबह से शाम हो गई लेकिन कोई संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं मिला। सोनू ने बताया जब दीक्षा ले ली तो वहां के लोगों को साथ रहना चाहिए था। एक दो लोग तो साथ होते लेकिन कोई नहीं था। रसिक दुलारी शरण का परिवार अब इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। परिवार का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।
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