मेरी मां मां नहीं पीएम के वीडियो पर संजय सिंह का पलटवार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उन्होंने राजनीतिक संवाद में मर्यादा और सम्मानजनक भाषा की आवश्यकता पर जोर दिया।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 01 अगस्त 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। वीडियो में प्रधानमंत्री ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान अपने और अपनी दिवंगत माता के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणियों का उल्लेख किया था। इस पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए और राजनीतिक विमर्श में इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर चिंता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री के वीडियो के बाद तेज हुई राजनीतिक बहस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किए गए वीडियो के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। वीडियो में प्रधानमंत्री ने कहा था कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत माता के खिलाफ भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। इस बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक संवाद की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में भाषा के स्तर पर भी बहस को जन्म दे रहा है। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।
संजय सिंह ने उठाए कई सवाल
संजय सिंह ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की माता के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में सभी माताओं का समान सम्मान होना चाहिए और किसी भी महिला के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना सभी दलों और समर्थकों की जिम्मेदारी है। उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
राजनीतिक संवाद की भाषा पर बहस
संजय सिंह ने अपने बयान में दावा किया कि राजनीतिक विरोध के दौरान कई नेताओं को भी अपमानजनक टिप्पणियों और अभद्र संदेशों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक माध्यमों पर बढ़ती कटुता लोकतांत्रिक संवाद के लिए चिंता का विषय है।उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक विचारधाराओं का विरोध किया जा सकता है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और अभद्र भाषा किसी भी स्थिति में उचित नहीं मानी जानी चाहिए। उनके अनुसार लोकतंत्र में असहमति और सम्मान दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।
समर्थकों की भूमिका पर भी उठे सवाल
संजय सिंह ने कहा कि राजनीतिक दलों के समर्थकों को भी संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई बार नेताओं और उनके परिवारों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं, जिससे सामाजिक वातावरण प्रभावित होता है।उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक संवाद को स्वस्थ बनाना है तो सभी पक्षों को आत्ममंथन करना होगा। लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर अपमानजनक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी बयानबाजी
प्रधानमंत्री के वीडियो और उसके बाद आई प्रतिक्रियाओं ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। विभिन्न दल इस मुद्दे को अपने-अपने दृष्टिकोण से देख रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक मर्यादा का विषय मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे बढ़ती राजनीतिक कटुता से जोड़कर देख रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में शालीनता और सम्मान बनाए रखना सभी पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी है।