जेपी नड्डा से मिले सीजेपी नेता, क्या मिला भरोसा
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा प्रश्नपत्र लीक को लेकर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। सौरभ दास के अनुसार मंत्री ने उचित स्तर पर बातचीत कराने का भरोसा दिया है, लेकिन अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 जुलाई 2026
नई दिल्ली में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा प्रश्नपत्र लीक प्रकरण को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। मुलाकात के बाद सौरभ दास ने बताया कि मंत्री ने उनकी सभी मांगों को गंभीरता से सुना और उन्हें उचित स्तर पर चर्चा कराने का भरोसा दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय या लिखित आश्वासन नहीं मिला है। इसलिए आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा और जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शन समाप्त नहीं किया जाएगा।
जेपी नड्डा से मिले सीजेपी प्रतिनिधि, सौरभ दास ने मुलाकात के बाद क्या कहा
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा प्रश्नपत्र लीक प्रकरण को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच सोमवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुलाकात हुई। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की। इस बैठक को छात्र आंदोलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने सीधे केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री के सामने अपनी मांगें रखीं।मुलाकात के बाद सौरभ दास ने कहा कि उन्होंने आंदोलन की पूरी पृष्ठभूमि, छात्रों की समस्याओं और संगठन की मांगों को विस्तार से मंत्री के सामने रखा। उनके अनुसार जेपी नड्डा ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि इस विषय पर उचित स्तर पर चर्चा की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय या आधिकारिक आश्वासन नहीं मिला है।
सौरभ दास ने सामाजिक माध्यम पर क्या जानकारी दी
सौरभ दास ने मुलाकात के बाद सामाजिक माध्यम पर एक विस्तृत संदेश साझा किया। उन्होंने बताया कि वह और आशुतोष रांका दोपहर से ही केंद्रीय मंत्री के आवास पर मौजूद थे और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों की चिंताओं, आंदोलन की परिस्थितियों और संगठन की मांगों को क्रमवार तरीके से मंत्री के सामने रखा।सौरभ दास के अनुसार जेपी नड्डा ने बातचीत के दौरान किसी भी मांग को तुरंत स्वीकार करने का वादा नहीं किया, लेकिन यह भरोसा अवश्य दिलाया कि पूरे मामले पर सरकार के उचित स्तर पर विचार-विमर्श कराया जाएगा। उन्होंने इसे सकारात्मक शुरुआत बताया, लेकिन साथ ही कहा कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा। जब तक सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सीजेपी ने सरकार के सामने कौन-कौन सी मांगें रखीं
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग यह थी कि आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी बाधा के रिहा किया जाए और उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखने की अनुमति दी जाए। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।दूसरी प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने अथवा उनका इस्तीफा लेने की थी। संगठन का आरोप है कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा प्रश्नपत्र लीक प्रकरण में नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी अनियमितता सामने आई है तो जवाबदेही तय करना सरकार का दायित्व है।तीसरी मांग उन अभ्यर्थियों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की थी, जिन्होंने कथित रूप से परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या की। संगठन ने मांग की कि ऐसे प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आंदोलन जारी रखने का एलान क्यों किया गया
सौरभ दास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी ओर से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि केवल बातचीत या आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जा सकता। जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन या व्यक्ति का नहीं बल्कि देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है। इसलिए संगठन अपने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में रखते हुए आगे बढ़ाएगा। उन्होंने सभी समर्थकों से संयम बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील भी की।
राजनीतिक हलकों में क्यों बढ़ी चर्चा
जेपी नड्डा और सीजेपी प्रतिनिधियों की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार आंदोलनकारियों के साथ औपचारिक संवाद की प्रक्रिया शुरू करती है तो लंबे समय से चल रहे गतिरोध को समाप्त करने का रास्ता निकल सकता है। दूसरी ओर विपक्ष लगातार सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहा है।यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब छात्र आंदोलन को लेकर देशभर में राजनीतिक माहौल गर्म है। संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर लगातार बहस हो रही है। ऐसे में केंद्र सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच संवाद की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या इस मुलाकात से समाधान की उम्मीद बढ़ी है
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी बड़े जन आंदोलन में संवाद सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होता है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच हुई यह मुलाकात सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक निर्णय सामने नहीं आया है, इसलिए आंदोलन की दिशा आने वाले दिनों में सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।यदि सरकार प्रतिनिधियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करती है और औपचारिक वार्ता शुरू होती है तो विवाद के समाधान की संभावना बढ़ सकती है। वहीं यदि कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।