सांस की नली में फंसा प्लास्टिक, CPR से बची जान:लखनऊ में डॉक्टरों ने सक्शन मशीन से निकाला, फेफड़ों से दाल का पानी भी साफ किया
लखनऊ के डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने चोकिंग की शिकार महिला की जान बचाने में सफल रहे। महिला की श्वास नली में भोजन के अंश और प्लास्टिक का टुकड़ा फंस गया था। जिसके चलते तेजी से उसकी कंडीशन बिगड़ रही थी। इस बीच आनन फानन में परिजन उसे लेकर नजदीकी अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने पहले CPR देकर फिर सक्शन पंप से अंदर फंसे प्लास्टिक के टुकड़े को निकाला। इसके बाद ICU में शिफ्ट कर उसकी जांच बचाने में कामयाब रहे। इमरजेंसी में गंभीर कंडीशन में लाई गई थी महिला हर्षिता के पति विक्की मयानी ने बताया कि शाम करीब छह बजे उन्हें अचानक उल्टियां शुरू हुईं थी। इसके बाद उसे लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। यहां इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिल ने जांच के बाद जरूरी इंजेक्शन दिए। पर उसकी कंडीशन में सुधार नहीं हुआ। कुछ देर बाद हर्षिता को सांस लेने में परेशानी होने लगी। इस बीच निदेशक डॉ.जीपी गुप्ता अपने कार्यालय से इमरजेंसी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने हर्षिता नाम की महिला मरीज को गंभीर हालत में इमरजेंसी में देखा। उन्होंने तुरंत मरीज की जांच की। मरीज में नाड़ी और सांस के संकेत नहीं मिल रहे थे। बिना देर किए CPR देना शुरू किया। साथ ही तत्काल मरीज को ICU में शिफ्ट किया गया। सांस की नली में मिला प्लास्टिक मरीज की सांस की नली में पाइप डालकर जांच की गई तो उसमें प्लास्टिक का टुकड़ा फंसा मिला। सक्शन मशीन से उसे निकालने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसे पेट की ओर खिसकाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि उल्टी के दौरान दाल का पानी फेफड़ों में पहुंच गया था। मशीन से साफ किए फेफड़े, अब हालत सामान्य डॉक्टरों ने मशीन की मदद से सांस की नली और फेफड़ों में पहुंचा दाल का पानी बाहर निकाला। इसके बाद हर्षिता की हालत धीरे-धीरे सुधरने लगी। अब वह सामान्य रूप से सांस ले रही हैं। डॉ.जीपी गुप्ता ने बताया कि सांस की नली में कोई बाहरी वस्तु फंसने या उल्टी का पदार्थ फेफड़ों में जाने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
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