सदन में अभद्रता मामले में पुलिस कमिश्नर से मिले 15-पार्षद:नवीन पंडित बोले- छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं, विधानसभा में तो सिर फट जाते हैं
सदन में महिला पार्षद से धक्का–मुक्की व अभद्रता का मामला शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर तक पहुंच गया। शुक्रवार को 15 भाजपा पार्षदों का प्रतिनिधि मंडल पुलिस कमिश्नर से मिलने पहुंचा, जहां पार्षद दल के नेता नवीन पंडित ने भाजपा के पांच पार्षदों के खिलाफ पार्षद लक्ष्मी कोरी के शिकायती पत्र को निरस्त करने की मांग की। नवीन पंडित ने कहा कि–सदन में छोटी–मोटी बातें होती रहती हैं, इसपर पार्षद लक्ष्मी कोरी को शिकायती पत्र नहीं देना चाहिए। सदन का मुद्दा सदन तक रहना चाहिए, उन्होंने दो महिला समेत पांच पार्षदों के खिलाफ प्रार्थना पत्र नहीं देना चाहिए था। मौके पर फजलगंज इंस्पेक्टर थे, किसी ने कोई अभद्रता नहीं की। अगर कोई अभद्रता हुई थी, तो उन्हें संगठन और महापौर से शिकायत करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा में तो कार्रवाई के दौरान सिर फट जाते हैं, कुर्सियां चल जाती है, तो क्या दूसरे दिन कोई कार्रवाई होती है? अगर कोई बात थी तो महापौर को लिख कर देना चाहिए था। 30 सितंबर को डीसीपी सेंट्रल से की थी शिकायत बता दें कि 30 सितंबर को वार्ड-10 की पार्षद लक्ष्मी कोरी ने डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में भाजपा पार्षद आकर्ष बाजपेई, वंदना शर्मा, विद्या वर्मा, गोविंद शुक्ला, गोलू शुक्ला ने उन्हें घेर लिया, गाली-गलौज करते हुए धक्का-मुक्की की गई। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। वहीं पार्षद पवन गुप्ता की शिकायत पर बुधवार को स्वरुप नगर थाने की पुलिस 26 सितंबर को हुई घटना की जांच के सिलसिले में नगर निगम के स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम में सीसीटीवी फुटेज देखने पहुंची थी। पार्षदों पर धक्का-मुक्की करते हुए हाथापाई का आरोप पार्षद लक्ष्मी कोरी ने बताया था कि 26 सितंबर को वह नगर निगम सदन की कार्यवाही में शामिल होने पहुंची थीं। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि कौशलपुरी मंडल मंत्री मनीष बाजपेयी और पार्षद पवन गुप्ता को महापौर के बेटे बंटी पांडेय और अनुराग पांडेय ने एक कमरे में बंद कर दिया है। उन्होंने इसका विरोध किया। उस समय पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद थे। दोपहर करीब 2:15 से 2:30 बजे के बीच उन्होंने सदन की कार्यवाही के दौरान महापौर को इस मामले की जानकारी देने की कोशिश की। पार्षद लक्ष्मी कोरी ने कहा कि वह दलित वर्ग से आती हैं और सुरक्षित सीट से चुनाव जीतकर दोबारा पार्षद बनी हैं। इसके बावजूद सदन में उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। आरोप था कि उन्हें बागी पार्षद बताते हुए सदन से बाहर जाने को कहा गया। साथ ही, उन्हें अपमानित भी किया गया था। भाजपा पार्षदों ने कहा कि- लक्ष्मी कोरी बार-बार चिल्ला रहीं थीं जिसके बाद शुक्रवार को भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित के साथ 15 भाजपा पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से मिलने पहुंचा, हालांकि 2 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश होने के चलते पुलिस कमिश्नर नही मिले। जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर के बंगले मिलने पहुंचा। पार्षद नवीन पंडित ने इस दौरान कहा कि 26 सितंबर को सदन की कार्रवाई के दौरान वार्ड–10 की पार्षद लक्ष्मी कोरी महापौर प्रमिला पांडेय के सामने चिल्लाने लगी, तभी पार्षद आलोक पांडेय वहां आ गए वो भी आत्महत्या करने की बात कहते हुए हंगामा करने लगे। उस समय हम सब पार्षद शहर की गंभीर समस्या पर चर्चा कर रहे थे। महापौर ने उन्हें मना किया, फिर भी वो चिल्लाती रहीं। पार्षदों ने समय बर्बाद न करने की बात कही, तो आलोक पांडेय सदन से बाहर चले गए और लक्ष्मी कोरी अपनी सीट पर जाकर बैठ गईं और थाने में हमारे पांच पार्षदों के खिलाफ प्रार्थना पत्र दे आयीं। हमारी मांग है कि लक्ष्मी कोरी का शिकायती पत्र निरस्त किया जाए।
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