सेंट्रल-मार्केट में महीनों से चल रहा महिलाओं का धरना स्थगित:9 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई, लंबा समय होने के कारण फैसला

Oct 01, 2026 - 17:41
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सेंट्रल-मार्केट में महीनों से चल रहा महिलाओं का धरना स्थगित:9 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई, लंबा समय होने के कारण फैसला
मेरठ के शास्त्रीनगर सेक्टर-2 में करीब छह महीने से धरने पर बैठी महिलाओं ने गुरुवार शाम 4 बजे प्रेसवार्ता की। महिलाओं ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होने के कारण फिलहाल उन्होंने अपना धरना स्थगित करने का फैसला लिया है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि धरना खत्म नहीं किया गया है। महिलाओं का कहना है कि सड़क पर बैठना फिलहाल बंद किया गया है, लेकिन आंदोलन और उनकी आपसी सक्रियता जारी रहेगी। 'न दबाव में बैठी थी, न दबाव में हट रही हैं' राधा गुप्ता ने कहा कि वे किसी के दबाव में धरने पर नहीं बैठी थीं और न ही किसी के दबाव में अब उठी हैं। उन्होंने कहा, "हमने अपनी मर्जी से धरना शुरू किया था और अपनी मर्जी से ही इसे स्थगित कर रहे हैं। धरना चलाने वाला हमारे अलावा कोई और नहीं था।" उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई में अभी काफी समय है, इसलिए समय की स्थिति को देखते हुए धरना स्थगित किया गया है। फोन और ग्रुप के जरिए जारी रहेगी सक्रियता राधा गुप्ता ने कहा कि धरना स्थगित करने का मतलब यह नहीं है कि महिलाएं आंदोलन से अलग हो गई हैं। सभी महिलाएं ग्रुप में एक्टिव हैं और लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि फोन पर बातचीत और बैठकें कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाएं चैन से नहीं बैठी हैं, क्योंकि उनके सिर पर अभी भी कार्रवाई की चिंता बनी हुई है। 9 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में जरूरत पड़ी तो फिर सड़क पर उतरेंगे शहर के अन्य हिस्सों में भी इस मुद्दे को लेकर व्यापारियों के सक्रिय होने पर राधा गुप्ता ने कहा कि महिलाओं ने करीब छह महीने तक आंदोलन किया और अपनी तरफ से पूरी मेहनत की। अब व्यापारी भी आगे आकर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो महिलाएं दोबारा उनके साथ खड़ी होंगी। उनका कहना था कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और जरूरत के समय सभी महिलाएं फिर से साथ आकर खड़ी होंगी। पुनर्वास मंजूर नहीं, जहां हैं वहीं रहने की मांग पुनर्वास को लेकर राधा गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को किसी भी कीमत पर पुनर्वास मंजूर नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उन्हें जहां वे रह रही हैं, वहीं रहने दिया जाए। उन्होंने कहा कि उनके आवास के साथ छोटे-मोटे व्यवसाय और काम भी वहीं से जुड़े हैं। ऐसे में दूसरी जगह जाने की स्थिति में वे नहीं हैं। महिलाओं ने सरकार से कहा कि उन्हें उनके वर्तमान स्थान पर ही रहने और अपना काम जारी रखने दिया जाए।

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