शाहजहांपुर में रात भर जले थे साधुओं के शव:विसरा-डीएनए सुरक्षित, मंदिर संरक्षक और आरोपी के बीच था विवाद, जावनरों को भी पीटता था आरोपी
शाहजहांपुर में दो साधुओं की हत्या कर उनके शव जलाने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पहले भी जेल जा चुका था। परिवार के वादे के बावजूद, जेल से बाहर आने के बाद उसने यह वारदात की। दोनों साधुओं के शव रात भर जलने से मांस पूरी तरह जल चुका था, सिर्फ हड्डियां बची थीं। डॉक्टरों को मौत का कारण पता लगाने में मुश्किल हुई। शवों का विसरा और डीएनए सुरक्षित रखा गया है। इस हत्याकांड में आरोपी और मंदिर के संरक्षक के बीच जमीन विवाद सामने आया है। मृतक साधुओं के परिजनों ने कहा कि विवाद चाचा-भतीजे के बीच था, साधुओं का इसमें कोई कसूर नहीं था। ग्रामीणों के मुताबिक, होली से पहले जेल जाने से पहले आरोपी ने बाबा बिहारी दास के तख्त के पास 15 मिनट तक बाइक से चक्कर लगाए थे और जान से मारने की धमकी दी थी। बिहारी दास एक फैर, हाथ और आंख से दिव्यांग थे। गांव में उसकी इतनी दहशत थी कि कोई शिकायत नहीं करता था। ग्रामीणों को डर है कि आरोपी के छूटने पर वह फिर कोई घटना कर सकता है।उसकी पत्नी और बच्चे भी डरे हैं।पुलिस ने उसे उसके घर से गिरफ्तार किया था। ग्रामीणों के अनुसार, डेढ़ से दो बीघा खेत है जो गांव के रहने वाले शिवकुमार सिंह का है।आरोपी सुमित उनका भतीजा है।शिवकुमार ने उसी जमीन पर 25 से 30 गज पर मन्दिर बनवा दिया था।मंदिर के पास काफी जमीन है। जिसकी देखरेख साधु करते थे। ग्रामीणों के अनुसार,जब उसने बकरी के कई टुकड़े किये थे तब डर के कारण ग्रामीणों ने थाने में शिकायत नही कराई थी।यहां तक कि जब उसको पकड़कर थाने लाया गया।उससे पूछताछ की जा रही थी तब आरोपी पुलिसकर्मियों को ही घूरकर देखने लगा।आरोपी के परिवार ने कहा कि अगर वह रात में रोटी खा लेता तो शायद ये घटना नही होती। इस घटना के बाद एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा और डीआईजी अजय साहनी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मृतक के परिवारो से जानकारी ली।पता चला कि आरोपी का पिता जिला बदर अपराधी रहे चुका है वह थाने का हिस्ट्रीशीटर था। दरअसल ये घटना गुरुवार सुबह करीब सात बजे सामने आई थी। जब गांव के एक व्यक्ति ने मंदिर परिसर से धुआं निकलता देखा था। अंदर जाकर देखा तो दोनो साधुओं गोपाल दास और बिहारी दास के कंकाल पड़े थे। तब तक आग ठंडी भी नही हुई थी। उसके बाद मंदिर के संरक्षक शिवकुमार सिंह ने गांव के रहने वाले आरोपी सुमित पर हत्या कर शवों को जलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया था कि आरोपी सुमित चाहता था कि बाबा चले जाएं और वह इस मंदिर में रहने लगे। उसने कई बार साधुओं को जाने की धमकी भी दी थी।
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