सहारनपुर में मेला गुघाल की लोक संगीत संध्या:कलाकारों ने बांधा समा, महापौर बोले- युवाओं को सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना चाहिए

Sep 28, 2026 - 23:07
0
सहारनपुर में मेला गुघाल की लोक संगीत संध्या:कलाकारों ने बांधा समा, महापौर बोले- युवाओं को सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना चाहिए
सहारनपुर के मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में सोमवार शाम सात बजे जीआईसी सभागार में नगर निगम की ओर से लोक संगीत संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने लोकगीत, भजन और गजल की प्रस्तुतियों से माहौल को सुरमयी बना दिया। श्रोताओं ने कलाकारों की प्रस्तुतियों पर जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व विधायक रवीन्द्र कुमार मोल्हू, पाल समाज के संरक्षक बलजीत चौधरी, मेला चेयरमैन पार्षद संजय सैनी, आयोजन समिति अध्यक्ष पार्षद दिग्विजय चौहान, दल नेता पार्षद राजेंद्र कोहली, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, सह संयोजक ज्योति अग्रवाल, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश मंत्री नूतन शर्मा, पूर्व महानगर अध्यक्ष हेमंत अरोड़ा समेत अन्य अतिथियों ने भारत माता और माता अहिल्याबाई के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद महापौर डॉ. अजय कुमार समेत जनप्रतिनिधियों ने रिबन काटकर लोक संगीत संध्या का उद्घाटन किया। कार्यक्रम संयोजक सोपिन पाल और सह संयोजक जोगेंद्र लाला ने अतिथियों एवं पार्षदों का पटका पहनाकर स्वागत किया। अयोध्या से आए कलाकार सत्यांशु पटेल ने दुर्गा स्तुति के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने साथियों के साथ एक के बाद एक कई प्रस्तुतियां दीं। ‘रामजी के नमवा के ना जाने ला’, ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’, ‘कान्हा-कान्हा रटेली राधा प्यारी’ जैसे गीतों ने श्रोताओं को खूब आकर्षित किया। ‘मिर्जापुर कइला गुलजार और ‘ए सजनी ए सजनी...’ जैसे फोक गीतों के साथ गजल ‘किसको दिल दिया जाए सोचना जहरीले भी पेश की गई। सत्यांशु पटेल की प्रस्तुति ‘जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है, अभी हमने जीभर के देखा नहीं है’ ने कार्यक्रम में समां बांध दिया। ढोलक पर अमित कुमार, की-बोर्ड व बैंजो पर धर्मेंद्र सिंह, पैड पर विख्यात मिश्रा और सहगायन में अमन शर्मा ने उनका साथ दिया। महापौर डॉ. अजय कुमार ने युवाओं से लोकगीत, कला-संगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का ज्ञान हासिल कर सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोक संगीत हमारी परंपरा और संस्कृति से जुड़ा है, लेकिन आधुनिक दौर में यह विरासत पीछे छूट रही है। इसे बचाने और समाज को लोक संगीत के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User