सिद्धार्थनगर में नाबालिग से गैंगरेप के दो दोषियों को उम्रकैद:कोर्ट ने 65-65 हजार रुपए का लगाया जुर्माना, 10 साल बाद आया फैसला
सिद्धार्थनगर। पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दो दोषियों मनोज और रिंकू को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 65-65 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की 90 प्रतिशत राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। मामला वर्ष 2016 का है। 2016 में दर्ज हुआ था मुकदमा पीड़िता की बुआ ने गोल्हौरा थाने में शिकायत देकर बताया था कि राजेश, मनोज और रिंकू ने उनकी भतीजी को सिद्धार्थनगर के तिवारीपुर चौराहे पर किराए के मकान में रखा था। मनोज ऑर्केस्ट्रा चलाता था और आरोप था कि वह पीड़िता से जबरन नाच-गाना कराता था। शिकायत में तीनों पर दुष्कर्म और रिंकू पर शादी का झांसा देने का आरोप लगाया गया था। पीड़िता ने फोन पर अपनी बुआ को घटना की जानकारी दी। इसके बाद बुआ उसे लेकर थाने पहुंचीं। 4 नवंबर 2016 को राजेश, मनोज और रिंकू के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के बाद मनोज और रिंकू के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुआ। अदालत ने 15 दिसंबर 2018 को आरोप तय किए। पीड़िता समेत गवाहों की हुई गवाही सुनवाई के दौरान अदालत में पीड़िता, उसकी बुआ और स्टेनो जौहर सिंह की गवाही हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने मनोज और रिंकू को दोषी ठहराया। मामले में पीड़िता की चिकित्सीय जांच के दौरान शरीर पर चोट और खरोंच के निशान दर्ज किए गए थे। चिकित्सीय रिपोर्ट में नितंब पर चार और छह सेंटीमीटर के चोट के निशान सहित आंतरिक परीक्षण से जुड़े निष्कर्ष भी दर्ज थे। अपहरण और दूसरे अपराध में भी सजा अदालत ने दोनों दोषियों को अपहरण के मामले में तीन-तीन साल और विवाह का झांसा देकर ले जाने से संबंधित अपराध में पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई। अपहरण के मामले में दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये और दूसरे अपराध में 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत के आदेश के अनुसार सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना जमा नहीं करने पर निर्धारित अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पीड़िता के पुनर्वास के लिए भी निर्देश अदालत ने दोनों दोषियों पर लगाए गए कुल जुर्माने की 90 प्रतिशत राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया। पीड़िता को नियमानुसार क्षतिपूर्ति दिलाने और उसके पुनर्वास के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को फैसले की प्रति भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने फैसले की प्रति दोनों दोषियों को निशुल्क उपलब्ध कराने और सजा संबंधी आदेश जिला कारागार भेजने को भी कहा है।
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