संभल हिंसा केस में विष्णु शंकर की गवाही नहीं हुई:29 अक्टूबर को अगली सुनवाई, अभियुक्तों की ओर से वकील नहीं पहुंचे
संभल शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन गुरुवार को गवाही देने के लिए जिला न्यायालय पहुंचे। हालांकि, अभियुक्तों की ओर से जिरह के लिए कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते गवाही नहीं हो सकी। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 29 अक्टूबर तय की है। गुरुवार को जिला न्यायालय परिसर में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी कोर्ट की न्यायाधीश रागिनी सिंह की अदालत में संभल कोतवाली में दर्ज अपराध संख्या 337/2024 की सुनवाई हुई। विष्णु शंकर जैन गवाही के लिए पहुंचे थे। अदालत में शाम करीब 5 बजे तक अभियुक्तों के वकीलों का इंतजार किया गया, लेकिन कोई उपस्थित नहीं हुआ। विष्णु शंकर जैन ने अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए अदालत से आग्रह किया कि उनकी गवाही अगली तारीख पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जाए। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि 29 अक्टूबर को उनकी गवाही अदालत में होगी या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से। सर्वे के दौरान हिंसा से जुड़ा है मामला सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शालिनी सिंह ने बताया कि 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़कने के मामले में यह मुकदमा दर्ज किया गया था। सर्वे टीम में विष्णु शंकर जैन भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि अभियुक्तों की ओर से कोई अधिवक्ता पेश नहीं हुआ, इसलिए जिरह नहीं हो सकी। अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई थी एफआईआर मामले में संभल कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर अनुज तोमर की ओर से 24 नवंबर 2024 को विभिन्न क्षेत्रों के रहने वाले 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की 14 धाराओं के अलावा आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1932 की धारा 7, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3 और 4 तथा आयुध अधिनियम, 1959 की धाराओं 3, 25 और 27 के तहत आरोप लगाए गए थे। 19 नवंबर को दाखिल हुआ था मंदिर होने का दावा हिंदू पक्ष ने 19 नवंबर 2024 को चंदौसी स्थित सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट में शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए याचिका दाखिल की थी। अदालत के आदेश पर उसी दिन सर्वे का पहला चरण पूरा हुआ, जबकि दूसरा चरण 24 नवंबर को किया गया। दूसरे चरण के सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और हिंसा भड़क गई। घटना में पांच लोगों की मौत हुई थी, जबकि एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी और डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस घटना के बाद संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों के नाम शामिल किए गए थे। पुलिस ने 2,750 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे। बाद में चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर विधायक पुत्र का नाम हटा दिया गया। नोट: विष्णु शंकर जैन की सुरक्षा को देखते हुए गवाही की प्रक्रिया गोपनीय रखी गई थी। इसलिए उनकी मौजूदा पेशी के फोटो और वीडियो उपलब्ध नहीं हैं। खबर के साथ 24 नवंबर 2024 की घटना के दौरान के दृश्य इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
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