संभल हिंसा: कोर्ट में मुल्ला अफरोज की सुनवाई टली:NSA रद्द होने के बाद पहली बार कोर्ट पहुंचे, 5 अक्टूबर को होगी सुनवाई
संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज और गुलाम की गुरुवार को जिला न्यायालय में पेशी हुई। सुप्रीम कोर्ट की ओर से मुल्ला अफरोज की NSA के तहत निरुद्धि रद्द किए जाने के बाद जिला न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में उसकी यह पहली पेशी थी। मामले में धारा 313 BNS के तहत सुनवाई होनी थी, लेकिन मुल्ला अफरोज के अधिवक्ता आसिफ अख्तर की ओर से स्थगन प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद अदालत ने अंतिम अवसर देते हुए अगली तारीख 5 अक्टूबर तय की है। अधिवक्ता ने दिया स्थगन प्रार्थना पत्र जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि संभल कोतवाली के अपराध संख्या 340/2024 में बिलाल हत्याकांड से संबंधित मामले में मुल्ला अफरोज और गुलाम आरोपी हैं। दोनों के खिलाफ धारा 313 BNS के तहत कार्यवाही होनी थी। गुरुवार को मुल्ला अफरोज के अधिवक्ता की ओर से स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया, जिस पर अभियोजन ने आपत्ति दर्ज कराई। राहुल दीक्षित के मुताबिक, अदालत ने स्थगन प्रार्थना पत्र पर अंतिम अवसर देते हुए 5 अक्टूबर की तारीख तय की है। इस दिन दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 313 की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी अभियोजन ने कहा- कार्यवाही टालने से नहीं मिलेगा लाभ जिला शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि मुल्ला अफरोज की ओर से पहले भी स्थगन प्रार्थना पत्र दिए गए हैं। उनके मुताबिक, लगातार सुनवाई टलने से पत्रावली की कार्यवाही में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि अगली तारीख पर भी सुनवाई में उपस्थित नहीं होते हैं तो अदालत अपने स्तर से आदेश कर सकती है और लागत भी लगा सकती है। अभियोजन की ओर से यह भी कहा गया कि यदि अदालत स्थगन देती है तो मामले की सुनवाई डे-बाय-डे कराने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि पत्रावली की कार्यवाही जल्द पूरी हो सके। गुलाम और वारिस की पत्रावली में गवाह की जिरह पूरी राहुल दीक्षित ने बताया कि गुलाम और वारिस से संबंधित पत्रावली में वारिस की गिरफ्तारी और असलहा बरामदगी के गवाह उपनिरीक्षक दीपक राठी की जिरह पूरी कराई जा चुकी है। उनके मुताबिक, संबंधित मामले में सभी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं। NSA रद्द, लेकिन आपराधिक मामलों की सुनवाई जारी सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को मुल्ला अफरोज की NSA के तहत निरुद्धि को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि पुलिस के समक्ष दिए गए कथित कबूलनामे को अकेले निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपए का खर्च भी लगाया था। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वमान्य है, लेकिन NSA रद्द होने का असर लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई पर नहीं है। उनके मुताबिक, मुल्ला अफरोज के खिलाफ इन मामलों में साक्ष्य और गवाहों की कार्यवाही के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
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