संभल हिंसा...NSA हटने से मुल्ला अफरोज का परिवार खुश:संभल में भाई बोला- कागजों में मोहम्मद, पुलिस ने मुल्ला लिखा, 3 बच्चे इंग्लिश मीडियम पढ़ रहे
संभल हिंसा के मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज पर लगी NSA को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अफरोज के भाई फरोग आलम सहित पूरे परिवार ने कहा कि उन्हें न्यायालय से ही न्याय मिलने की उम्मीद है। बड़े भाई ने कहा कि उनके भाई का नाम मुल्ला अफरोज नहीं है, बल्कि पुलिस ने उसका नाम मुल्ला अफरोज लिखा है। बड़े भाई ने बताया कि पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप झूठे हैं। दैनिक भास्कर ने मुल्ला अफरोज के परिवार से बात की, पढ़िए रिपोर्ट… अब पढ़िए परिवार का बयान संभल के नखासा थाना क्षेत्र के दीपा सराय में मुल्ला अफरोज का परिवार रहता है। उनके भाई फरोग आलम ने बताया- मैं इंग्लिश का शिक्षक हूं। मुरादाबाद जेल में बंद मेरे भाई के आधार कार्ड, पैन कार्ड से लेकर सभी दस्तावेजों में उसका नाम मोहम्मद अफरोज है। लेकिन पुलिस ने उसे मुल्ला अफरोज लिख दिया। फरोग आलम ने कहा, "मैं सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता की प्रशंसा करता हूं। हमें बहुत राहत मिली है।" बड़े भाई ने अपने छोटे भाई अफरोज का पक्ष रखते हुए कहा कि उस पर गलत आरोप लगाए गए हैं। उसके खिलाफ कोई सबूत भी नहीं है। हमारा भाई प्लॉट खरीदने और उनकी खरीद-फरोख्त का काम करता है। घटना के समय वह वहां मौजूद भी नहीं था। यह बिल्कुल हकीकत है। वह अपने घर पर था। उसके ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। भाई घर आए जाए, यही प्राथमिकता फरोग ने कहा- अभी मैं कुछ नहीं बता सकता, क्योंकि अभी प्रक्रिया जारी है। देखते हैं, भविष्य में क्या होता है। फिलहाल हमारी पहली प्राथमिकता यह है कि हमारा भाई घर पर आ जाए। उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं, वे बुरी तरह रोते हैं। हमें सुप्रीम कोर्ट और अपनी सरकार से पूरी उम्मीद है कि इंशाअल्लाह हमारा भाई हमारे घर वापस आ जाएगा। हम शिक्षित लोग हैं। मैं खुद दूसरों को पढ़ाता हूं।" फरोग ने कहा कि उनका परिवार इस तरह की किसी गतिविधि में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी नजर में हिंदू हो या मुसलमान, सब बराबर हैं। हम एक ही भगवान की औलाद हैं। हममें क्या फर्क है? हिंदू, क्रिश्चियन और पारसी सभी बराबर हैं। हम सभी समान लोग हैं।” पिता के जेल जाने से बच्चे परेशान अफरोज के तीन बच्चे हैं, जिनके नाम मोहम्मद तारिक (8 वर्ष), उसामा (7 वर्ष) और हिदाया (4 वर्ष) हैं। तारिक कक्षा 3, उसामा कक्षा 1 और हिदाया नर्सरी में पढ़ता है। उनका भाई अपने तीन बच्चों को संभल के बड़े इंग्लिश मीडियम स्कूल एंजेल पब्लिक में पढ़ा रहा था। पिता के जेल जाने के बाद बच्चे परेशान हैं। फरोग ने बताया कि वह रोजाना खुद बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं और उनकी पढ़ाई में मदद करते हैं, ताकि उन्हें पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो और पिता की कमी भी कम महसूस हो। 24 नवंबर 2024 को हुई थी संभल हिंसा 24 नवंबर 2024 को हुई संभल हिंसा के 55 दिन बाद, जनवरी 2025 में संभल कोतवाली पुलिस ने मुख्य आरोपी के रूप में मुल्ला अफरोज को गिरफ्तार किया था। अक्टूबर 2025 में उसके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की गई। करीब 350 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को अफरोज की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लगाई गई NSA को रद्द कर दिया और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि पुलिस हिरासत में दिए गए बयान को NSA के तहत हिरासत का आधार बनाया जा सकता है या नहीं, जबकि ऐसा बयान कानूनी तौर पर अदालत में मान्य नहीं होता। उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट से कहा कि मुल्ला अफरोज की रिहाई से क्षेत्र में दोबारा हिंसा भड़कने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की पूरी आशंका थी। इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निवारक नजरबंदी जरूरी थी। 19 नवंबर 2024 को दाखिल हुआ था मंदिर होने का दावा आपको बता दें कि 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट, चंदौसी में पेश किया गया था। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ। दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। सर्वे को बाधित करते हुए हिंसा भड़क गई। पुलिस पर पथराव और फायरिंग की गई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित एएसपी अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। संभल कोतवाली और नखासा थाना क्षेत्र में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित कई लोगों को नामजद करते हुए 2,750 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि, चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर विधायक पुत्र का नाम निकाल दिया गया। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 158 अभियुक्तों को जेल भेजा गया। इनमें तीन महिलाएं और संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता बताए गए फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे—मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम—भी शामिल हैं। मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर 2025 में रासुका (NSA) लगाई गई थी। इसके बाद वारिस और गुलाम पर भी रासुका के तहत कार्रवाई की गई। वहीं, शारिक साठा के खिलाफ रेड कॉर्नर लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को 1 अगस्त 2025 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था। उन्हें 24 मार्च को जेल भेजा गया था और 131 दिन बाद जेल से बाहर आए थे। आपको बता दें कि कई अभियुक्तों को इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है
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