सोनौली बॉर्डर से छह नेपाली बच्चों की घर वापसी:शादी का झांसा देकर लाई गई किशोरी ऑर्केस्ट्रा में नचाई जा रही थी, प्रशासन को सौंपे

Oct 03, 2026 - 09:21
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सोनौली बॉर्डर से छह नेपाली बच्चों की घर वापसी:शादी का झांसा देकर लाई गई किशोरी ऑर्केस्ट्रा में नचाई जा रही थी, प्रशासन को सौंपे
महराजगंज के भारत-नेपाल सोनौली बॉर्डर पर बीती देर रात भारत के अलग-अलग हिस्सों से रेस्क्यू किए गए छह नेपाली बच्चों को नेपाल प्रशासन और एक नेपाली एनजीओ के सुपुर्द किया गया। बच्चों में तीन लड़कियां और तीन लड़के शामिल हैं। दिल्ली की संस्था किन इंडिया ने संबंधित प्रशासन और बाल संरक्षण संस्थाओं के साथ कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद बच्चों को नेपाल भेजा। संस्था के मुताबिक, बच्चों को अलग-अलग मामलों में रेस्क्यू किया गया था। इनमें एक किशोरी को नेपाल के चितवन से शादी का झांसा देकर भारत लाए जाने का आरोप है। वहीं पश्चिमी चंपारण से दो लड़कियों को कथित तस्करी के मामले में रेस्क्यू किया गया था। छह बच्चों को सोनौली सीमा पर नेपाल प्रशासन और एनजीओ को सौंपने के बाद उनकी घर वापसी की प्रक्रिया पूरी हुई। किन इंडिया के मुताबिक, नेपाल के चितवन की रहने वाली एक किशोरी को शादी का झांसा देकर भारत लाया गया था। आरोप है कि उसे भारत लाने वाला व्यक्ति पहले से शादीशुदा था। किशोरी को पत्नी बनाकर ऑर्केस्ट्रा में नचाया जा रहा था। मामले में कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद किशोरी को सोनौली सीमा के जरिए नेपाल भेजा गया। इसके अलावा पश्चिमी चंपारण से दो अन्य लड़कियों को रेस्क्यू किए जाने की जानकारी संस्था ने दी है। संस्था के अनुसार दोनों की कथित तौर पर तस्करी की जा रही थी। तीन लड़कों में एक 5 साल बाद लौटा नेपाल रेस्क्यू किए गए तीन लड़कों में एक नेपाल के सर्लाही जिले का रहने वाला है। संस्था के अनुसार यह बच्चा करीब पांच साल बाद नेपाल लौट रहा है। बच्चों को अलग-अलग परिस्थितियों में भारत से रेस्क्यू किया गया था, जिसके बाद संबंधित प्रशासन और बाल संरक्षण संस्थाओं के समन्वय से उनकी कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई गई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों को नेपाल प्रशासन और संबंधित एनजीओ को सौंपा गया, ताकि उन्हें परिवार या संबंधित संस्था तक पहुंचाया जा सके। नेपाल एंबेसी और प्रशासन के साथ मिलकर रेस्क्यू किन इंडिया के सदस्य नवीन जोशी ने बताया कि उनकी संस्था नेपाल एंबेसी के साथ-साथ भारत के सीडब्ल्यूसी, एसडीएम और डीएम कार्यालयों के समन्वय से बच्चों के रेस्क्यू और पुनर्मिलन का काम करती है। भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर इस तरह के मामलों में संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर कार्रवाई की जाती है। संस्था का कहना है कि रेस्क्यू के बाद बच्चों की पहचान, कानूनी प्रक्रिया और परिवार से संबंधित जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से संबंधित एजेंसी या परिवार तक पहुंचाया जाता है। अब तक 1460 से ज्यादा बच्चों का रेस्क्यू नवीन जोशी के मुताबिक, किन इंडिया अब तक भारत के अलग-अलग हिस्सों से 1460 से अधिक बच्चों का रेस्क्यू कर चुकी है। संस्था भारत और नेपाल की संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर बच्चों को सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाने का काम कर रही है। सोनौली बॉर्डर पर छह नेपाली बच्चों को सौंपे जाने के बाद उनकी नेपाल वापसी की प्रक्रिया पूरी हुई। संस्था के अनुसार भारत और नेपाल की एजेंसियों के सहयोग से रेस्क्यू और बच्चों के पुनर्मिलन का काम आगे भी जारी रहेगा।

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