सपा में शुरू हुई जिलाध्यक्ष बनने की दौड़:जिले में ओबीसी, महानगर में ब्राह्मण अध्यक्ष मिल सकता है
पत्रकारवार्ता के दौरान हुए थप्पड़ कांड के बाद सपा की जिला एवं महानगर कार्यकारिणी भंग कर दी गई है। अब नई कार्यकारिणी का गठन होगा। जिला एवं महानगर में अध्यक्ष बनने के लिए नेताओं ने दौड़ लगानी शुरू कर दी है। कई पूर्व जिलाध्यक्ष भी इसके दावेदार हैं। सपा सूत्रों की मानें तो जिले में ओबीसी और महानगर में ब्राह्मण अध्यक्ष मिल सकता है। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं।
सबसे ज्यादे भागदौड़ जिलाध्यक्ष को लेकर है। जिले में लंबे समय से ब्रजेश कुमार गौतम जिलाध्यक्ष थे। वह दलित समाज से आते हैं। आमतौर पर गोरखपुर जिले में सपा यादवों पर ही भरोसा जताती रही है। यही कारण है कि जिलाध्यक्ष का पद खाली होने के बाद सर्वाधिक यादव ही सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इस बार भी जिलाध्यक्ष के पद पर यादव का दावा ज्यादा मजबूत है। जिलाध्यक्ष पद ये हैं बड़े दावेदार पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश यादव, चंद्रबलि यादव, प्रह्लाद यादव अपनी दावेदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही थप्पड़ कांड के बाद चर्चा में आए पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी के नाम की चर्चा भी जोरों पर है। सपा नेता संतोष यादव का दावेदारों की सूची में है। जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्ति राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा।
इनमें नगीना प्रसाद साहनी के नाम की चर्चा तेज है। थप्पड़ कांड के बाद वह एक बार फिर शीर्ष नेतृत्व की नजर में हैं। निषाद मतदाताओं को रिझाने के लिए पार्टी यह दांव खेल सकती है। हालांकि नगीना प्रसाद साहनी की पसंद गोरखपुर ग्रामीण से टिकट पाना है लेकिन पूरे जिले में संदेश देने के लिए पार्टी उन्हें जिलाध्यक्ष बना सकती है। इस घटना के बाद उनको लेकर निषाद समाज के लोगों में सहानुभूति भी है। जानिए महानगर अध्यक्ष पद के लिए कौन है दावेदार सपा सूत्रों की मानें तो महानगर में ब्राह्मण नेताओं के नाम जिलाध्यक्ष के लिए चर्चा में हैं। युवा नेता गवीश दूबे का नाम भी तेजी से चल रहा है। इससे पहले कृष्ण कुमार त्रिपाठी दो बार महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं। सपा नेता कीर्तिनिधि पांडेय का नाम भी चर्चा में चल रहा है। इसके अलावा कई मुस्लिम नेता भी महानगर अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं। आमतौर पर परंपरागत रूप से महानगर अध्यक्ष का पद मुस्लिम नेताओं का माना जाता है। लेकिन इस बार स्थितियां बदली हैं। यादव व मुस्लिमों को पार्टी फोकस में नहीं रख रही है। जिसके चलते महानगर में किसी ब्राह्मण चेहरे के अध्यक्ष बनने की संभावना है।
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