स्टेशन पर मिलने वाला पानी कितना सुरक्षित:रेलवे ने 2915 बार क्लोरीन जांची, 415 सैंपल बैक्टीरियल टेस्ट और 46 की केमिकल जांच
रेलवे स्टेशनों, कॉलोनियों और कर्मचारियों से जुड़े परिसरों में मिलने वाला पानी कितना सुरक्षित है, इसकी जांच के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल ने बड़े स्तर पर सैंपलिंग कराई है। 18 अगस्त से 20 सितंबर तक मंडल में 2915 बार पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की जांच की गई। इसके साथ ही 415 पानी के नमूनों की बैक्टीरियोलॉजिकल और 46 नमूनों की केमिकल जांच राज्य सरकार की प्रयोगशाला में कराई गई। यह जांच मंडल के 204 स्टेशनों, 115 रेलवे कॉलोनियों के अलावा डिपो, अस्पताल, रनिंग रूम, क्रू लॉबी और कार्यालयों में पानी की व्यवस्था की निगरानी के तहत हुई। 204 स्टेशन और 115 कॉलोनियां निगरानी में वाराणसी मंडल में यात्रियों और रेल कर्मचारियों के लिए पानी की व्यवस्था सिर्फ स्टेशन तक सीमित नहीं है। रेलवे की ओर से 204 स्टेशनों और 115 रेलवे कॉलोनियों में पानी के स्रोत और सप्लाई सिस्टम की नियमित जांच की जा रही है। इसके अलावा डिपो, चिकित्सालय, रनिंग रूम, क्रू लॉबी और कार्यालयों में लगी पानी की टंकियों, वाटर कूलर, फिल्टर, पाइपलाइन और पंपिंग सिस्टम की भी जांच की जा रही है। 2915 बार देखा गया पानी में क्लोरीन पानी को पीने योग्य बनाए रखने में क्लोरीन की अहम भूमिका होती है। इसी वजह से रेलवे ने 18 अगस्त से 20 सितंबर के बीच 2915 अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण किए। इसके लिए पानी के अलग-अलग स्रोतों और वितरण बिंदुओं से सैंपल लिए गए। रेलवे के अनुसार, इन जांचों के लिए निर्धारित सैंपलिंग प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षकों की निगरानी में पानी के नमूने लिए जा रहे हैं। 415 सैंपल की बैक्टीरियल जांच सिर्फ क्लोरीन की मात्रा जांचने तक ही निगरानी सीमित नहीं रखी गई। इस दौरान 415 पानी के नमूनों की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच भी कराई गई। इसका उद्देश्य पानी में मौजूद बैक्टीरिया से जुड़े संभावित जोखिम की जांच करना है। इसके अलावा 46 पानी के नमूनों का रासायनिक विश्लेषण राज्य सरकार की प्रयोगशाला में कराया गया। यानी अलग-अलग स्तर पर पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए क्लोरीन, बैक्टीरियल और केमिकल टेस्ट किए गए। टंकी से लेकर नल तक निगरानी रेलवे की पानी की व्यवस्था में सिर्फ स्रोत की जांच नहीं की जा रही है। टंकियों से लेकर यात्रियों तक पहुंचने वाले नलों और वाटर कूलर तक की व्यवस्था देखी जा रही है। रेलवे के अनुसार पानी की टंकियों, वाटर कूलर, यूवी-आरओ सिस्टम, फिल्टर, वाटर टैप और पाइपलाइनों की नियमित सफाई और डिसइंफेक्शन कराया जा रहा है। इसके साथ ही खराबी आने से पहले सिस्टम की मेंटेनेंस करने के लिए प्रिवेंटिव मेंटेनेंस भी किया जा रहा है। क्लोरोस्कोप से जांच, जरूरत पर लैब भेजे सैंपल रेलवे के स्वास्थ्य विभाग की टीम अवशिष्ट क्लोरीन की जांच के लिए क्लोरोस्कोप का इस्तेमाल कर रही है। बैक्टीरियोलॉजिकल जांच के लिए एच-टू विजुअल्स और एचआई-मीडिया किट का इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां पानी की विस्तृत जांच की जरूरत होती है, वहां उसके केमिकल पैरामीटर की जांच अधिकृत प्रयोगशाला में कराई जा रही है। यात्रियों के स्वास्थ्य को लेकर निगरानी रेल प्रशासन का कहना है कि यात्रियों और रेल परिवार के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पानी के स्रोत से लेकर वितरण व्यवस्था तक लगातार निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग विभाग की टीमें तय समय-सारणी के अनुसार निरीक्षण और रखरखाव कर रही हैं।
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