सुसाइड करने वाले स्कूल संचालक का अंतिम संस्कार:बजरंग दल के कार्यकर्ता भी थे, दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

Oct 01, 2026 - 19:03
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सुसाइड करने वाले स्कूल संचालक का अंतिम संस्कार:बजरंग दल के कार्यकर्ता भी थे, दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
शामली में बुधवार देर शाम फंदे से लटके मिले स्कूल संचालक का गुरुवार शाम करीब 4 बजे अंतिम संस्कार किया गया। अजय कुमार (35) की मौत से परिवार में मातम पसरा है। पत्नी, माता-पिता, दोनों बच्चों और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल है। अजय की मौत से उनके छह वर्षीय बेटे अपूर्व और तीन वर्षीय बेटी समृद्धि के सिर से पिता का साया उठ गया। मामला थानाभवन क्षेत्र के गांव मस्तगढ़ का है। मस्तगढ़ में स्कूल चलाते थे अजय अजय मस्तगढ़ में अपना स्कूल चलाते थे। वह रोजाना अपने गांव कैड़ी से मस्तगढ़ आते-जाते थे। परिजनों के मुताबिक बुधवार को भी वह स्कूल गए थे। परिवार को उनके व्यवहार से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला था, जिससे उन्हें किसी अनहोनी का अंदेशा हो। पिता गोपाल ने बताया कि बुधवार शाम करीब 4:30 बजे से परिजन अजय को फोन कर रहे थे, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। देर शाम मस्तगढ़ में उनका शव फंदे से लटका मिला। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद गुरुवार को अंतिम संस्कार किया गया। तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे पिता गोपाल के अनुसार अजय बचपन से पढ़ाई में होनहार और मिलनसार थे। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। बड़े भाई मनोहर लाल यूपी पुलिस में कार्यरत हैं, जबकि छोटे भाई विकास कुमार भगवानपुर, हरिद्वार की एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। पिता खेतीबाड़ी करते हैं। सात साल पहले हुई थी शादी परिजनों के अनुसार करीब सात साल पहले अजय की शादी अजमतगढ़ निवासी दीपांशी से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा अपूर्व करीब छह साल और बेटी समृद्धि करीब तीन साल की है। अजय स्कूल चलाकर परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय थे अजय बाबरी निवासी बजरंग दल एवं विश्व हिंदू परिषद के जिला सत्संग प्रमुख आकाश शर्मा ने बताया कि अजय मिलनसार स्वभाव के थे और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। करीब तीन साल पहले वह बजरंग दल के सक्रिय कार्यकर्ता रहे और थानाभवन प्रखंड में सह मंत्री का दायित्व भी संभाला था। मस्तगढ़ में स्कूल शुरू करने के बाद वह संगठन को ज्यादा समय नहीं दे पा रहे थे। शुक्रवार को बच्चों को प्रतियोगिता में ले जाना था शिकारपुर निवासी अजय के परिचित धीरज कुमार और सोनू ने बताया कि अजय सभी से मिलनसार व्यवहार रखते थे। धीरज के अनुसार बुधवार शाम करीब 6 बजे तक अजय को शिकारपुर गांव में देखा गया था। शुक्रवार को गाजियाबाद में बच्चों की खेल प्रतियोगिता होनी थी। अजय को अपने स्कूल के बच्चों को प्रतियोगिता में लेकर जाना था और वह इसकी तैयारियों में जुटे थे।अचानक हुई अजय की मौत से परिवार के साथ उनके परिचित और ग्रामीण भी स्तब्ध हैं। गुरुवार को अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों और ग्रामीणों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

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