दिल्ली में कारोबार शुरू करना होगा आसान, एक पोर्टल से मिलेंगी सभी मंजूरियां

दिल्ली सरकार ने कारोबारियों के लिए एकीकृत ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रस्तावित कानून के तहत भवन योजना, अग्निशमन, पानी, सीवर और बिजली जैसी कई मंजूरियां एक ही पोर्टल से मिल सकेंगी। पंजीकरण के बाद सामान्य परिस्थितियों में तीन साल तक नियमित निरीक्षण से राहत और समय पर निर्णय नहीं होने पर स्वतः मंजूरी का प्रावधान भी प्रस्तावित है।

Sep 03, 2026 - 12:02
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दिल्ली में कारोबार शुरू करना होगा आसान, एक पोर्टल से मिलेंगी सभी मंजूरियां

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली  | 03 सितंबर 2026

 दिल्ली में कारोबार शुरू करने और उसे संचालित करने वाले लोगों के लिए सरकार ने बड़ी राहत देने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘दिल्ली कारोबार सुगमता विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी गई है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य कारोबारियों को विभिन्न सरकारी मंजूरियां आसानी से और तय समय सीमा में उपलब्ध कराना है।

एक ही पोर्टल से पूरी होगी कारोबार से जुड़ी प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत कारोबारियों को अलग-अलग सरकारी विभागों के कार्यालयों में जाकर आवेदन करने की जरूरत कम हो जाएगी। सभी जरूरी मंजूरियों, पंजीकरण, लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाणपत्र से जुड़ी सेवाओं को एक ही ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे एक ही दस्तावेज को अलग-अलग विभागों में बार-बार जमा करने की परेशानी भी कम होगी।सरकार का उद्देश्य कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना है। निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभागों को आवेदन पर निर्णय लेना होगा। इससे नए उद्यम लगाने वाले लोगों को सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाले अतिरिक्त समय से राहत मिलने की उम्मीद है।

तीन साल तक नियमित निरीक्षण से राहत

प्रस्तावित कानून में कारोबारियों को निरीक्षण के मामले में भी राहत देने की बात कही गई है। किसी उद्यम के पंजीकरण के बाद सामान्य परिस्थितियों में शुरुआती तीन वर्षों तक नियमित निरीक्षण नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे कारोबारियों को अनावश्यक जांच-पड़ताल और विभागीय प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।हालांकि, गंभीर प्रकृति की शिकायत मिलने पर संबंधित उद्यम का निरीक्षण किया जा सकेगा। यानी सुरक्षा या गंभीर नियम उल्लंघन से जुड़े मामलों में सरकारी एजेंसियों के पास कार्रवाई करने का अधिकार बना रहेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य कारोबारियों और सरकारी तंत्र के बीच विश्वास बढ़ाना है।

डीएसआईआईडीसी को मिलेगी अहम जिम्मेदारी

एकीकृत व्यवस्था को संचालित करने की जिम्मेदारी दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम को नोडल संस्था के रूप में देने का प्रस्ताव है। यह संस्था कारोबारियों से आवेदन प्राप्त करने से लेकर अलग-अलग मंजूरियां दिलाने तक पूरी प्रक्रिया में समन्वय करेगी। संबंधित सरकारी विभागों और नागरिक एजेंसियों के बीच तालमेल स्थापित करना भी इसकी जिम्मेदारी होगी।इस व्यवस्था के अंतर्गत भवन योजना की मंजूरी, अग्निशमन संबंधी अनुमति, पानी और सीवर कनेक्शन तथा बिजली कनेक्शन जैसी सेवाओं को शामिल किया जाएगा। इससे कारोबारियों को कई विभागों के बीच भटकने के बजाय एक ही व्यवस्था के माध्यम से अपनी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने में सुविधा मिलेगी।

समय पर फैसला नहीं तो स्वतः मंजूरी का प्रावधान

प्रस्तावित विधेयक में समय सीमा को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान रखा गया है। यदि किसी सक्षम अधिकारी ने निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन पर निर्णय नहीं लिया, तो कुछ मामलों में संबंधित मंजूरी, पंजीकरण या अनापत्ति प्रमाणपत्र को स्वतः स्वीकृत माना जा सकेगा। इस व्यवस्था को कारोबारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।इसके अलावा अग्नि सुरक्षा, भवन योजना, प्रदूषण संबंधी अनुमति और कम क्षमता वाले बिजली कनेक्शन जैसी कुछ प्रक्रियाओं में स्वयं घोषणा के आधार पर काम पूरा करने का प्रस्ताव है। इससे सामान्य और कम जोखिम वाले कारोबारों के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।

पहले से मौजूद पंजीकरण के लिए दोबारा आवेदन की जरूरत नहीं

प्रस्तावित व्यवस्था में पहले से सरकारी पंजीकरण करा चुके कारोबारियों को भी राहत देने का प्रावधान है। जिन उद्यमों का वस्तु एवं सेवा कर, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास कानून या श्रम संहिताओं के तहत पंजीकरण हो चुका है, उन्हें कुछ अन्य संबंधित पंजीकरण दोबारा कराने की जरूरत नहीं होगी।इसका फायदा व्यापार, स्वास्थ्य-व्यापार, खान-पान गृह तथा दुकान और प्रतिष्ठान से जुड़े पंजीकरण के मामलों में मिल सकता है। सरकार का उद्देश्य एक ही कारोबारी जानकारी के लिए अलग-अलग विभागों में बार-बार आवेदन करने की व्यवस्था को कम करना है।

सरकार के पास मौजूद दस्तावेज दोबारा नहीं मांग सकेंगे विभाग

नए प्रस्ताव में दस्तावेजों से जुड़ी परेशानी कम करने पर भी जोर दिया गया है। यदि किसी कारोबारी या आवेदक की कोई जानकारी पहले से दिल्ली सरकार के किसी विभाग के पास उपलब्ध है, तो उससे वही जानकारी दोबारा मांगने की अनुमति नहीं होगी।इस व्यवस्था से कारोबारियों का समय और कागजी प्रक्रिया दोनों कम होने की उम्मीद है। साथ ही सरकारी विभागों के बीच उपलब्ध जानकारी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे आवेदन प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने में मदद मिल सकती है।

जोखिम वाली गतिविधियों पर ही रहेगा विशेष नियंत्रण

प्रस्तावित कानून में कारोबार की स्वतंत्रता बढ़ाने के लिए नकारात्मक सूची आधारित व्यवस्था अपनाने की बात कही गई है। इसके तहत सामान्य रूप से कारोबार करने की अनुमति होगी, लेकिन ऐसी गतिविधियां जो निर्धारित नकारात्मक सूची में शामिल होंगी, उन पर विशेष नियम लागू रहेंगे।इस सूची में अधिक जोखिम वाली कारोबारी गतिविधियों को शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सामान्य कारोबार पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाने के बजाय केवल अधिक जोखिम वाली गतिविधियों को अलग श्रेणी में रखकर नियंत्रित करना है। इससे कारोबार करने की स्वतंत्रता बढ़ाने के साथ सुरक्षा और नियमन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी।

केंद्र की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा प्रस्ताव

दिल्ली मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित ‘दिल्ली कारोबार सुगमता विधेयक, 2026’ को स्वीकृति के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। केंद्र से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद ही इसे आगे लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी।दिल्ली सरकार का कहना है कि इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य कारोबारियों के लिए सरकारी सेवाओं को सरल, समयबद्ध और एकीकृत बनाना है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो दिल्ली में नया कारोबार शुरू करने वालों के लिए मंजूरी और पंजीकरण से जुड़ी कई प्रक्रियाएं पहले की तुलना में आसान हो सकती हैं।

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