ट्रैफिक दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर रोक:हाईकोर्ट ने विभागीय व आपराधिक कार्यवाही पर उठाए सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में तैनात यातायात उपनिरीक्षक मोहन सिंह के खिलाफ शुरू की गई विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है और इसी मुद्दे को लेकर विचाराधीन याचिका के साथ सुनवाई हेतु पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने मोहन सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। मामला शादी के विवाद से जुड़ा मामला पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता के भाई पीतम सिंह की पत्नी सुनीता ने नवंबर 2025 में महिला थाना जनपद मथुरा में पति, सास, ससुर और जेठ यातायात उपनिरीक्षक मोहन सिंह सहित अन्य ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज उत्पीड़न एवं मारपीट संबंधी धाराओं एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराया था। आपराधिक मामले को हाईकोर्ट ने मीडिएशन एंड कॉन्सिलिएशन सेंटर में भेजा गया था। 3 सितंबर 2026 को पति और पत्नी दोनों पक्षों ने एक साथ रहने और सभी कानूनी कार्रवाइयों को समाप्त/वापस लेने पर सहमति जताई थी। गाजियाबाद पुलिस ने एक्शन लिया पारिवारिक विवाद में समझौता होने के बावजूद गाजियाबाद पुलिस द्वारा 14 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारी/कर्मचारी (दण्ड एवं अपील) नियमावली-1991 के तहत यातायात उपनिरीक्षक मोहन सिंह को आरोप पत्र जारी कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई। याची का कहना था कि जब मुख्य आपराधिक मामले में समझौता हो चुका है और मामला पुलिस रेगुलेशन के प्रावधानों के दायरे में आता है, तो एक ही तथ्यों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना।
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