यूपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड, सितंबर में 29.37 लाख करोड़ का लेनदेन

सितंबर 2026 में एकीकृत भुगतान व्यवस्था के जरिए 24.07 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि 29.37 लाख करोड़ रुपये रही। रोजाना औसतन 80.2 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए। पिछले साल सितंबर की तुलना में लेनदेन और कुल राशि दोनों बढ़े हैं, जबकि अगस्त की तुलना में सितंबर में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

Oct 01, 2026 - 15:23
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यूपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड, सितंबर में 29.37 लाख करोड़ का लेनदेन

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 1 अक्टूबर 2026

देश में डिजिटल भुगतान का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है और सितंबर 2026 के आंकड़ों ने इसकी एक और बड़ी तस्वीर सामने रखी है। सितंबर में एकीकृत भुगतान व्यवस्था के माध्यम से कुल 24.07 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि 29.37 लाख करोड़ रुपये रही। रोजाना औसतन 80 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए। यह पहली बार है जब एक महीने में प्रतिदिन औसतन लेनदेन की संख्या 80 करोड़ के पार पहुंची है।

सितंबर में यूपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड

सितंबर में देशभर में एकीकृत भुगतान व्यवस्था के जरिए 24.07 अरब लेनदेन किए गए। इन सभी लेनदेन का कुल मूल्य 29.37 लाख करोड़ रुपये रहा। आसान भाषा में समझें तो पूरे महीने में लोगों ने मोबाइल और क्यूआर संकेत के जरिए हजारों करोड़ रुपये के भुगतान और धन हस्तांतरण किए। रोजाना के औसत के हिसाब से करीब 80.2 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए।

एक दिन में औसतन कितने लेनदेन हुए

सितंबर के 30 दिनों में हुए कुल लेनदेन को देखें तो प्रतिदिन औसतन करीब 80.2 करोड़ भुगतान हुए। इसका मतलब है कि देश में हर दिन करोड़ों लोग खरीदारी, धन हस्तांतरण और दूसरी सेवाओं के भुगतान के लिए एकीकृत भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह आंकड़ा भारत में डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाता है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक इसका उपयोग व्यापक स्तर पर हो रहा है।

29.37 लाख करोड़ रुपये का हुआ लेनदेन

सितंबर में एकीकृत भुगतान व्यवस्था के माध्यम से कुल 29.37 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। इसे भारतीय मुद्रा में करीब 29 लाख 37 हजार करोड़ रुपये के बराबर समझा जा सकता है। इस हिसाब से प्रतिदिन औसतन करीब 97,900 करोड़ रुपये का लेनदेन इस व्यवस्था के जरिए हुआ। इससे पता चलता है कि डिजिटल माध्यम अब रोजमर्रा के भुगतान के साथ-साथ बड़े मूल्य के लेनदेन में भी इस्तेमाल हो रहा है।

पिछले साल के मुकाबले कितना बढ़ा लेनदेन

सितंबर 2025 में एकीकृत भुगतान व्यवस्था के जरिए 19.63 अरब लेनदेन हुए थे, जिनका कुल मूल्य 24.90 लाख करोड़ रुपये था। सितंबर 2026 में लेनदेन की संख्या बढ़कर 24.07 अरब और कुल राशि 29.37 लाख करोड़ रुपये हो गई। यानी एक साल में लेनदेन की संख्या और कुल मूल्य दोनों में वृद्धि दर्ज की गई। यह तुलना डिजिटल भुगतान के विस्तार की दिशा को समझने में मदद करती है।

अगस्त के मुकाबले सितंबर में क्या हुआ

अगस्त 2026 में एकीकृत भुगतान व्यवस्था के जरिए करीब 24.51 अरब लेनदेन हुए थे। सितंबर में यह संख्या 24.07 अरब रही, यानी मासिक आधार पर लेनदेन की संख्या कुछ कम रही। लेनदेन के कुल मूल्य में भी अगस्त के करीब 29.8 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले सितंबर में लगभग 1.4 प्रतिशत की कमी आई। इसका एक कारण अगस्त में 31 दिन और सितंबर में 30 दिन होना भी बताया गया है।

रोजमर्रा के भुगतान में बढ़ रहा इस्तेमाल

आज मोबाइल भुगतान का इस्तेमाल केवल बड़ी खरीदारी तक सीमित नहीं है। लोग किराने का सामान खरीदने, मोबाइल रिचार्ज कराने, बिजली-पानी का भुगतान करने और दुकानों पर क्यूआर संकेत के जरिए पैसे देने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे नकद धन रखने की जरूरत कई मामलों में कम हुई है। छोटे कारोबारियों के लिए भी डिजिटल भुगतान ग्राहकों से पैसा लेने का एक सामान्य माध्यम बन चुका है।

यूपीआई विरोध का मामला क्या था

सितंबर के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब व्यापारिक संगठनों ने एकीकृत भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावित शुल्क को लेकर विरोध की घोषणा की थी। व्यापारियों ने दो हजार रुपये से अधिक के कारोबारी लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत व्यापारी छूट दर को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि इससे कारोबारियों के लाभ पर असर पड़ सकता है और अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। बाद में वित्त मंत्री के साथ बैठक के बाद व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध को टालने का निर्णय लिया।

डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल का संकेत

सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि देश में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बड़े स्तर पर जारी है। एक महीने में 24 अरब से अधिक लेनदेन होना इस व्यवस्था की व्यापक पहुंच को दिखाता है। हालांकि, महीने-दर-महीने आंकड़ों की तुलना करते समय दिनों की संख्या और अन्य मौसमी कारणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। कुल मिलाकर, सितंबर के आंकड़ों ने भारत में डिजिटल भुगतान की बढ़ती भूमिका को फिर सामने रखा है।

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