UPPATHCON 2026 में 700 विशेषज्ञ होंगे शामिल:कानपुर में जुटेंगे देशभर के पैथोलॉजिस्ट और माइक्रोबायोलॉजिस्ट, AI एडवांस्ड डायग्नोस्टिक्स पर मंथन
रीजेंसी हॉस्पिटल लिमिटेड के डिपार्टमेंट ऑफ लैब साइंसेज की मेजबानी में इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट्स एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स (IAPM) के उत्तर प्रदेश चैप्टर का 33वां वार्षिक सम्मेलन UPPATHCON 2026 2 से 4 अक्टूबर तक कानपुर में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का आयोजन वीरांगना लक्ष्मीबाई ऑडिटोरियम, CSJM यूनिवर्सिटी में होगा। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “डीकोडिंग डिजीजः क्लूज़ टू कंक्लूजन्स” रखी गई है। तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से 700 से अधिक पैथोलॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, क्लिनिकल साइंटिस्ट, रिसर्चर्स और पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के अलावा दिल्ली, हरियाणा, मुंबई, रायपुर समेत कई राज्यों से विशेषज्ञ पहुंचेंगे। विदेश से भी प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी आयोजकों ने दी है। 200 से ज्यादा रिसर्च पेपर होंगे प्रस्तुत
सम्मेलन में 200 से अधिक शोधपत्रों की ओरल प्रेजेंटेशन के साथ पोस्टर प्रेजेंटेशन भी होंगे। पोस्टग्रेजुएट छात्रों और रिसर्चर्स को अपने मौलिक शोध को विशेषज्ञों के सामने रखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा ‘पैथोआर्ट’ के जरिए भी प्रतिभागी अपनी रचनात्मकता और वैज्ञानिक समझ प्रस्तुत कर सकेंगे। आयोजकों के मुताबिक सम्मेलन का उद्देश्य लैबोरेटरी डायग्नोसिस और क्लिनिकल निर्णय लेने की प्रक्रिया के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। रोजमर्रा की डायग्नोस्टिक चुनौतियों, नई तकनीकों और मरीजों की जांच में बदलते तरीकों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। 2 अक्टूबर को वर्कशॉप, 3 को होगा उद्घाटन
UPPATHCON 2026 की शुरुआत 2 अक्टूबर को प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप से होगी। इनमें डिजिटल पैथोलॉजी, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, एडवांस्ड PCR, नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग, इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (IHC), क्वालिटी एश्योरेंस और विशेष ग्रॉसिंग तकनीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्य सम्मेलन 3 और 4 अक्टूबर को होगा। 3 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। उद्घाटन के मुख्य अतिथि CSJM यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक होंगे। वहीं रीजेंसी हॉस्पिटल के CMD और आयोजन समिति के संरक्षक डॉ. अतुल कपूर गेस्ट ऑफ ऑनर होंगे। हर सिस्टम की बीमारियों और नई तकनीकों पर चर्चा
सम्मेलन के वैज्ञानिक कार्यक्रम में शरीर के अलग-अलग अंगों और उनसे जुड़ी बीमारियों पर विशेषज्ञ व्याख्यान होंगे। मास्टरक्लास, संगोष्ठियां और मल्टी-डिसिप्लिनरी पैनल डिस्कशन के जरिए आधुनिक पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी की चुनौतियों पर चर्चा होगी। आयोजकों के अनुसार, बीमारी का सटीक निष्कर्ष कई चरणों में जांच के बाद निकलता है। उदाहरण के तौर पर बायोप्सी के बाद जरूरत के अनुसार IHC और फिर मॉलिक्यूलर टेस्ट किए जाते हैं। इन जांचों के जरिए बीमारी की प्रकृति और उसके कारण को अधिक सटीक तरीके से समझने में मदद मिलती है, जिससे मरीज के उपचार में भी सहायता मिलती है। AI पर भी होगी चर्चा, विशेषज्ञों की भूमिका बनी रहेगी
सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक्स में इस्तेमाल पर भी चर्चा होगी। आयोजकों का कहना है कि AI डायग्नोस्टिक प्रक्रिया में विशेषज्ञों की सहायता कर सकता है, लेकिन इसे विशेषज्ञों का विकल्प नहीं माना जा सकता। AI संभावित विकल्पों की पहचान करने और बड़ी मात्रा में डेटा के विश्लेषण में मदद कर सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञ की समझ, क्लिनिकल जानकारी और चरणबद्ध जांच की आवश्यकता बनी रहती है। इसी वजह से सम्मेलन में पैथोलॉजिस्ट और माइक्रोबायोलॉजिस्ट के साथ क्लिनिशियंस को भी चर्चाओं में शामिल किया गया है। 45 से ज्यादा इंडस्ट्री स्टॉल लगाए जाएंगे
सम्मेलन में अकादमिक जगत के साथ डायग्नोस्टिक इंडस्ट्री की भागीदारी भी रहेगी। इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स (IVD) एग्जिबिशन में 45 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे। यहां डेलीगेट्स को लैबोरेटरी ऑटोमेशन, डायग्नोस्टिक रिएजेंट्स, डिजिटल पैथोलॉजी और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों के बारे में जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए अकादमिक क्विज भी आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य डायग्नोस्टिक रीजनिंग, त्वरित निर्णय क्षमता और पैथोलॉजी व माइक्रोबायोलॉजी की अवधारणाओं की समझ को बढ़ावा देना है। क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़े जाएंगे शोध और नई तकनीक
सम्मेलन का फोकस केवल नई तकनीकों और शोध तक सीमित नहीं रहेगा। आयोजकों के मुताबिक वैज्ञानिक चर्चाओं को मरीजों की रोजमर्रा की देखभाल और क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। पैथोलॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और क्लिनिशियंस के बीच बेहतर संवाद के जरिए डायग्नोसिस की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। रीजेंसी हॉस्पिटल लिमिटेड वर्ष 1995 से उत्तर प्रदेश के हेल्थकेयर सेक्टर में कार्यरत है। संस्थान के अनुसार, उसने राज्य के पहले मल्टी-स्पेशियलिटी टर्शियरी-केयर कॉर्पोरेट हॉस्पिटल के तौर पर अपनी शुरुआत की थी। UPPATHCON 2026 की मेजबानी को संस्थान ने क्लिनिकल लर्निंग, रिसर्च और डायग्नोस्टिक इनोवेशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया है। आयोजन समिति में ये लोग शामिल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजन समिति की अध्यक्ष डॉ. अंजलि तिवारी, आयोजन सचिव डॉ. दीप्ति गुप्ता, सह आयोजन सचिव डॉ. नूपुर त्रिवेदी, डॉ. शेफाली अग्रवाल, कोषाध्यक्ष डॉ. वैभव अग्रवाल, डॉ. पंकज मिश्रा, वैज्ञानिक समिति के सदस्य तथा अन्य आयोजन समिति के सदस्य डॉ. पंकज चौहान, डॉ. कृति, डॉ. नीति लूथरा, डॉ. प्रदीप पॉल और डॉ. चांद निगम मौजूद रहे।
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