वृंदावन में निकली राम बारात:चप्पे चप्पे पर नगर वासियों ने किया स्वागत,4 किलोमीटर का सफर हुआ 8 घंटे में तय
मंगलवार की देर शाम वृंदावन में प्रभु श्री राम की भव्य बारात निकाली गई। राम बारात का स्वागत करने के लिए नगर वासियों ने पलक पांवड़े बिछा दिए। हर कदम पर चारों भाइयों की आरती और स्वागत किया गया। स्वागत करने की ऐसी होड़ मची कि 4 किलोमीटर का सफर तय करने में बारात को 8 घंटे का समय लगा। राम बारात के जनकपुरी पहुंचने पर महिलाओं ने मंगल गीत गाए,जिसके बाद वरमाला की लीला का मंचन किया गया। गोपीनाथ बाजार से शुरू हुई राम बारात श्री रामलीला कमेटी के द्वारा आयोजित श्री रामलीला महोत्सव के पांचवे दिन प्रभु श्री राम की बारात निकाली गई। शहर के गोपीनाथ बाजार स्थित भागवत निवास से शुरू हुई राम बारात पत्थरपुरा,रंग जी मंदिर,चुंगी चौराहा,अनाज मंडी, प्रताप बाजार,रेतिया बाजार,लोई बाजार,बनखंडी, अठखंभा, बांके बिहारी बाजार होते हुए विद्यापीठ चौराहा पर बनाई जनकपुरी पहुंची। शाम 5 बजे शुरू हुई बारात रात 1 बजे जनकपुरी पहुंची। पग पग पर हुआ स्वागत राम बारात में चारों भाई राम,लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे ही घोड़ों पर विराजमान हुए सभी लोग जय जयकार करने लगे। इसके बाद शुरू हुआ जगह जगह स्वागत का सिलसिला। नगर वासियों ने प्रभु श्री राम की आरती उतारी,उनको प्रसाद अर्पित किया और बारातियों का स्वागत किया। प्रभु श्री राम की बारात का स्वागत करने में मंदिरों के प्रबंधन भी पीछे नहीं रहे। रंग जी मंदिर पहुंचने पर मंदिर के प्रबंधक आर कृष्णन और अन्य लोगों ने भगवान श्री रंगनाथ का प्रसादी चंदन लगाया। वहीं बांके बिहारी मंदिर पहुंचने पर सेवायत,गोपी गोस्वामी,ज्ञानेंद्र गोस्वामी,आकाश गोस्वामी ने आरती की। 6 दर्जन से ज्यादा झांकी हुई शामिल प्रभु श्री राम की बारात में 6 दर्जन से ज्यादा झांकी शामिल हुईं। एटा,अलीगढ़,आगरा और मथुरा से एक से बढ़कर एक झांकी आई। इसके अलावा 10 रोड शो करते कलाकर, अलग अलग शहरों से आए 8 बैंड और करतब करते हुए चल रहे मां काली के 5 स्वरूपों ने नगर वासियों को मोहित कर दिया। शहर के जिस रास्ते से राम बारात निकली वह रास्ता भक्तों से भरा नजर आया। जनक नंदनी ने फैंका लड्डू शहर के विभिन्न रास्तों से होते हुए राम बारात जब बांके बिहारी बाजार में बनाई गई जनकपुरी पहुंची तो अवध में विवाह के समय होने वाली परंपरा का निर्वहन किया गया। प्रभु श्री राम अपने भाइयों के साथ जैसे ही जनकपुरी पहुंचे तभी सीता जी और उनकी तीनों बहनों ने अपने अपने वर पर लड्डू फेंके। इसके बाद स्थानीय महिलाएं मंगल कलश लेकर दुराचार्य करने पहुंचीं। जहां जमकर हंसी ठिठोली हुई। करीब आधा घंटे चली लीला के बाद दुल्हन बनी जानकी जी और उनकी तीनों बहनों को मंच पर लाया गया,जहां वरमाला की लीला का मंचन हुआ। पांचवे दिन की लीला का विश्राम महाआरती से हुआ।
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