युवती की आत्महत्या में पड़ोसी को सजा:अलीगढ़ में पड़ोसी ने की छेड़खानी, युवती ने खाया था जहर; मौत से पहले बयान ने खोला राज

Oct 01, 2026 - 20:28
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युवती की आत्महत्या में पड़ोसी को सजा:अलीगढ़ में पड़ोसी ने की छेड़खानी, युवती ने खाया था जहर; मौत से पहले बयान ने खोला राज
अलीगढ़ के क्वार्सी क्षेत्र में चार साल पुराने युवती की मौत के मामले में अदालत ने पड़ोसी पवन को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना है। मामला छेड़खानी और जहरीला पदार्थ खिलाने के आरोप से जुड़ा था। शुरुआत में पवन के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। हालांकि अदालत ने हत्या का अपराध साबित नहीं माना और धारा 306 IPC यानि आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषसिद्ध किया। मामले में युवती के परिजन कोर्ट में अपने शुरुआती आरोपों से पलट गए थे, लेकिन मौत से पहले एसडीएम के सामने दर्ज युवती का बयान और विसरा रिपोर्ट अहम साक्ष्य बने। ‘खाया नहीं, खिलाया है’...बयान में पवन का नाम 20 अप्रैल 2021 को युवती को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया था। अगले दिन तत्कालीन एसडीएम कोल ने डॉक्टर की मौजूदगी में उसका मृत्युपूर्व बयान दर्ज किया। युवती ने पहले कहा कि उसने जहर खाया है। पूछने पर उसने स्पष्ट किया- ‘खाया नहीं, खिलाया है।’ जहर खिलाने वाले के बारे में पूछे जाने पर उसने पड़ोसी पवन का नाम लिया। बयान में युवती ने बताया था कि परिवार के लोग गेहूं काटने गए थे। इसी दौरान पवन घर पहुंचा और उसके साथ छेड़खानी करने लगा। उसने यह भी कहा था कि पवन पहले उसके घर नहीं आता था। घर से मिली थी कीटनाशक की बोतल जांच के दौरान पुलिस ने घर में चारपाई के नीचे से प्लास्टिक की बोतल बरामद की थी। उस पर ‘Terminator 505’ लिखा था। पोस्टमार्टम में शरीर पर कोई बाहरी या अंदरूनी चोट नहीं मिली। बाद में विसरा जांच में आर्गेनोक्लोरो कीटनाशक की पुष्टि हुई। परिजन कोर्ट में पलटे एडीजीसी तरुण कुमार के अनुसार मामले में युवती के माता-पिता ने कोर्ट में अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं की। पिता ने कहा कि गांव के लोगों ने शिकायत लिखवाकर आरोपियों के नाम उसमें डाल दिए थे। मां ने भी घटना के संबंध में किसी व्यक्ति को घर में आते-जाते देखने से इनकार किया। इसके बावजूद अदालत ने मृत्युपूर्व बयान को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट के अनुसार बयान के समय युवती होश में थी और डॉक्टर ने उसे बयान देने के लिए फिट बताया था। बयान दर्ज करने वाले एसडीएम ने भी कोर्ट में इसकी पुष्टि की। एक आरोपी जांच में बाहर, पवन पर चला मुकदमा एफआईआर में पवन के साथ एक अन्य आरोपी राकेश कुमार को भी नामजद किया गया था। जांच में उसकी भूमिका सामने नहीं आने पर पुलिस ने उसके खिलाफ अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। इसके बाद पवन के खिलाफ मुकदमा चलता रहा। अदालत ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद माना कि पवन की छेड़खानी और उसके कृत्य ने युवती को आत्महत्या के लिए उकसाया। हत्या की धारा 302 का अपराध साबित नहीं होने पर कोर्ट ने धारा 306 IPC के तहत पवन को दोषी ठहराया। फैसला 30 सितंबर 2026 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-11, अलीगढ़ ने सुनाया।इस संस्करण में मृतका, उसके माता-पिता और गांव/मोहल्ले की ऐसी पहचान संबंधी जानकारी हटा दी गई है, जबकि आरोपी पवन और सह-नामजद आरोपी राकेश की पहचान रखी गई है।

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