संबित पात्रा का कांग्रेस पर हमला, बोले- नेहरू के समय हुई थी पहली वोट चोरी
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में 10 बार मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण हुआ। उन्होंने नेहरू और सरदार पटेल का भी जिक्र किया।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026
भारतीय जनता पार्टी के सांसद संबित पात्रा ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में पहली बार मतों की चोरी जवाहरलाल नेहरू के समय हुई थी। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पर्याप्त समर्थन होने के बावजूद नेहरू प्रधानमंत्री बने थे।
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में देश में 10 बार मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराया गया था। उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इस प्रक्रिया के माध्यम से 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए होते, तो लोग सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे होते। उन्होंने विपक्ष पर लोकतंत्र के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।
संबित पात्रा ने दावा किया कि मौजूदा प्रक्रिया में लगभग एक करोड़ ऐसे लोगों के नाम हटाए गए हैं, जो दो अलग-अलग स्थानों पर मतदान कर रहे थे। उनके मुताबिक, ऐसे नामों को हटाना मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि यदि इतने बड़े स्तर पर गलत तरीके से नाम हटाए गए हैं, तो इसके विरोध में जनता का व्यापक आंदोलन क्यों दिखाई नहीं दे रहा है।
बीजेपी सांसद ने जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के बीच प्रधानमंत्री पद को लेकर हुए घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरदार पटेल को अधिक समर्थन मिलने के बावजूद नेहरू प्रधानमंत्री बने। संबित पात्रा ने इसी प्रसंग को देश में पहली मतों की चोरी बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप और ऐतिहासिक घटनाक्रम की उनकी व्याख्या है।
इस बयान के जरिए बीजेपी ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की है। वहीं, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद लगातार जारी है। संबित पात्रा के इस बयान से एक बार फिर मतों की चोरी, लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।
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