बच्चों के दूध पर सवाल! नेस्ले से एफएसएसएआई ने क्यों मांगे प्रमाण

खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने नेस्ले इंडिया के लैक्टोजेन प्रो 1 और नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 उत्पादों पर किए गए पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता संबंधी दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं। कंपनी का कहना है कि वह पहले ही नियामक को अपना जवाब दे चुकी है। फिलहाल, केवल प्रमाण मांगने का अर्थ उत्पादों पर प्रतिबंध या उनके नुकसानदेह होने की पुष्टि नहीं है।

Oct 22, 2026 - 12:44
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दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026

बच्चों के लिए दूध और पोषण संबंधी उत्पाद खरीदते समय माता-पिता अक्सर उनकी पैकेजिंग पर लिखे दावों पर भरोसा करते हैं। कंपनियां अपने उत्पादों में मौजूद पोषक तत्वों, उनके पाचन और बच्चों के स्वास्थ्य को मिलने वाले संभावित लाभों की जानकारी देती हैं। इसी बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने नेस्ले इंडिया के दो शिशु आहार उत्पादों से जुड़े कुछ दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं। यह मामला लैक्टोजेन प्रो 1 पाउडर और नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 से संबंधित है।

लैक्टोजेन प्रो 1 के दावे पर क्यों उठे सवाल

नेस्ले के लैक्टोजेन प्रो 1 पाउडर की पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में इसमें मौजूद व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने का दावा किया गया है। व्हे प्रोटीन दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जिसका इस्तेमाल कई पोषण उत्पादों में किया जाता है। खाद्य सुरक्षा नियामक ने कंपनी से पूछा है कि उसके उत्पाद में मौजूद इस प्रोटीन के आसानी से पचने के दावे के समर्थन में कौन-से वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। नियामक का सवाल प्रोटीन की मौजूदगी से अधिक उससे जुड़े पाचन संबंधी दावे के आधार पर केंद्रित है।

नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 की रोग प्रतिरोधक क्षमता संबंधी बात पर आपत्ति

नेस्ले के दूसरे उत्पाद नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 के पैकेट और प्रचार सामग्री में पांच प्रकार के मानव दुग्ध ओलिगोसैकराइड्स की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है। कंपनी के दावे के अनुसार, ये घटक शरीर की सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहारा देने में मदद करते हैं। मानव दुग्ध ओलिगोसैकराइड्स विशेष प्रकार के कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो मां के दूध में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। नियामक ने इस उत्पाद से जुड़े स्वास्थ्य लाभ के दावे पर सवाल उठाते हुए कंपनी से संबंधित नियमों और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।

किसी पोषक तत्व की मौजूदगी और स्वास्थ्य लाभ का दावा अलग

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर किसी पोषक तत्व की मौजूदगी बताना और उससे किसी विशेष स्वास्थ्य लाभ का दावा करना दो अलग बातें हैं। किसी उत्पाद में कोई घटक मौजूद होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि वह निश्चित रूप से किसी विशेष स्वास्थ्य लाभ को बढ़ावा देगा। इसी वजह से ऐसे दावों के लिए वैज्ञानिक आधार और लागू खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन महत्वपूर्ण होता है। नियामक की आपत्ति इसी अंतर और संबंधित दावों के औचित्य को लेकर है।

नैन उत्पाद में प्रोटीन के पाचन संबंधी दावे पर भी सवाल

नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 के संबंध में केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ा दावा ही चर्चा में नहीं है। इसकी प्रचार सामग्री में व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने से संबंधित दावा भी सामने आया है। खाद्य सुरक्षा नियामक ने इस दावे के समर्थन में भी कंपनी से वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं। अब इस मामले में कंपनी की ओर से दिए गए जवाब और दावों के आधार का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा।

नेस्ले इंडिया ने क्या जवाब दिया

नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता के अनुसार, खाद्य सुरक्षा नियामक की हालिया टिप्पणी में उन्हीं मुद्दों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें 18 सितंबर को उठाया गया था। कंपनी का कहना है कि वह इन मुद्दों पर अपना जवाब पहले ही प्राधिकरण को सौंप चुकी है। इस प्रकार कंपनी ने अपना पक्ष रखने की बात कही है, जबकि नियामक की ओर से दावों के समर्थन में प्रमाण मांगे जाने का मामला चर्चा में है। अंतिम स्थिति संबंधित दावों की जांच और नियामक की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

क्या दोनों उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है

इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि वैज्ञानिक प्रमाण मांगने या किसी दावे पर सवाल उठाने का अर्थ अपने आप उत्पाद पर प्रतिबंध लग जाना नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नियामक ने संबंधित दावों के आधार पर सवाल उठाए हैं और कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दोनों उत्पाद नुकसानदेह साबित हो चुके हैं। माता-पिता को उत्पादों के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी और नियामक की आगे की कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए।

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