अमेरिका ने यूरोपीय यूनियन पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया
दि राइजिंग न्यूज। वॉशिंगटन । 23 मई, 2025 । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन (EU) से आने वाले सभी सामानों पर 1 जून 2025 से 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप ने यह कदम व्यापार संतुलन और अमेरिकी कंपनियों के हितों की रक्षा के नाम पर उठाया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय यूनियन व्यापार में अमेरिका का शोषण कर रहा है, जिसके चलते अमेरिका को हर साल 250 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार घाटा उठाना पड़ रहा है।
दि राइजिंग न्यूज। वॉशिंगटन । 23 मई, 2025 ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन (EU) से आने वाले सभी सामानों पर 1 जून 2025 से 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप ने यह कदम व्यापार संतुलन और अमेरिकी कंपनियों के हितों की रक्षा के नाम पर उठाया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय यूनियन व्यापार में अमेरिका का शोषण कर रहा है, जिसके चलते अमेरिका को हर साल 250 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार घाटा उठाना पड़ रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा,
"यूरोपीय यूनियन, जिसे अमेरिका का व्यापारिक फायदा उठाने के लिए बनाया गया था, के साथ हमारी बातचीत कहीं नहीं पहुंच रही है। उनके व्यापारिक अवरोध, वैट टैक्स, अनुचित कॉर्पोरेट पेनल्टी, और अन्य नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हैं
ट्रंप ने साफ किया कि अगर कोई उत्पाद अमेरिका में ही बनता है, तो उस पर यह टैरिफ लागू नहीं होगा। इससे अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

बाजारों में हड़कंप
इस घोषणा के बाद अमेरिकी और यूरोपीय शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई। यूरोप के ऑटो, टेक्नोलॉजी और फाइनेंस सेक्टर की कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
प्रमुख प्रभावित क्षेत्र
-
ऑटोमोबाइल
-
एयरोस्पेस
-
फार्मास्युटिकल्स
-
कृषि उत्पाद
संभावित असर और प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार युद्ध को जन्म दे सकता है। यूरोपीय नेताओं की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन व्यापारिक हलकों में चिंता बढ़ गई है कि जवाबी कार्रवाई में EU भी अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा सकता है।
यूरोपीय यूनियन (European Union - EU) का मतलब
यूरोपीय यूनियन मुख्य रूप से यूरोप में स्थित 27 देशों का एक राजनीतिक और आर्थिक संगठन है। इसका उद्देश्य इन देशों के बीच आपसी सहयोग, आर्थिक एकता, और साझा नीतियों के जरिए पूरे क्षेत्र का विकास करना है। यूरोपीय यूनियन के सदस्य देशों के बीच सामान, सेवाएँ, पूँजी और लोगों का स्वतंत्र आदान-प्रदान होता है, यानी इन देशों के नागरिक बिना वीजा के एक-दूसरे के देशों में आ-जा सकते हैं, व्यापार कर सकते हैं और काम कर सकते हैं।
यूरोपीय यूनियन की स्थापना 1993 में मास्त्रिख संधि के तहत हुई थी, और इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स में है। इसके 19 सदस्य देश 'यूरो' मुद्रा का उपयोग करते हैं। यूरोपीय यूनियन के कानून सभी सदस्य देशों पर लागू होते हैं और यह संगठन साझा विदेश नीति, सुरक्षा नीति, न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए भी काम करता है। यह 27 देश इस प्रकार हैं-
-
ऑस्ट्रिया
-
बेल्जियम
-
बुल्गारिया
-
क्रोएशिया
-
साइप्रस
-
चेक गणराज्य
-
डेनमार्क
-
एस्टोनिया
-
फिनलैंड
-
फ्रांस
-
जर्मनी
-
ग्रीस
-
हंगरी
-
आयरलैंड
-
इटली
-
लातविया
-
लिथुआनिया
-
लक्जमबर्ग
-
माल्टा
-
नीदरलैंड
-
पोलैंड
-
पुर्तगाल
-
रोमानिया
-
स्लोवाकिया
-
स्लोवेनिया
-
स्पेन
-
स्वीडन
इन देशों के बीच सामान, सेवाएँ, पूंजी और लोगों का स्वतंत्र आदान-प्रदान होता है, और कई सदस्य देश यूरो मुद्रा का भी उपयोग करते हैं
यूरोपीय यूनियन की प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 1 जून से यूरोपीय यूनियन (EU) पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद यूरोपीय यूनियन की ओर से तत्काल कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन संकेत हैं कि EU इस कदम को गंभीरता से ले रहा है और जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ने कहा है कि EU की प्राथमिकता अमेरिका के साथ "न्यायसंगत और संतुलित समझौता" करना है, जैसा कि दोनों पक्षों के विशाल व्यापार और निवेश संबंधों के अनुरूप हो। इसके अलावा, रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर अमेरिका यह टैरिफ लागू करता है तो EU भी अमेरिकी सामानों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है, जिसकी कुल राशि 108 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। ट्रंप की घोषणा के बाद यूरोपीय शेयर बाजारों में तेज गिरावट आई है और निवेशकों में चिंता बढ़ गई है कि यह कदम अमेरिका-यूरोप व्यापार युद्ध को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि EU जल्द ही आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी कर सकता है और दोनों पक्षों के बीच व्यापार वार्ता में तनाव और बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला वैश्विक व्यापार में अस्थिरता ला सकता है और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत और संभावित समझौते पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।